Saturday, July 29, 2017

UPSC-Hindi-Daily-News-29-July

सामान्य अध्ययन दैनिक समाचार 

29 July 2017(Saturday)

29 July 2017(Saturday)

1.पनामागेट में दोषी नवाज ने दिया इस्तीफा, भाई को सौंप सकते हैं कमान


  • पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बहुचर्चित पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की संपत्ति की जांच के बाद संयुक्त जांच समिति (जेआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें और वित्त मंत्री इशाक डार को शुक्रवार को अयोग्य करार दिया।
  • नवाज शरीफ ने इसके बाद प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवाज शरीफ अपने भाई शहबाज शरीफ को पीएम की कुर्सी सौंप सकते हैं। हालांकि इसमें अभी 45 दिन का पेच है ऐसे में तब तक के लिए शरीफ किसी और विश्वास पात्र को अंतरिम प्रधानमंत्री भी बना सकते हैं।
  • शहबाज शरीफ अभी पंजाब के सीएम हैं। हालांकि, शहबाज पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं। उन्हें पीएम बनने के लिए चुनाव लड़ना होगा।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक शहबाज के पीएम चुने जाने तक 45 दिनों के लिए अंतरिम पीएम के रूप में जिन लोगों के नाम दौड़ में शामिल हैं उनमें रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, स्पीकर अयाज सादिक, बिजनेसमैन शाहिद अब्बासी प्रमुख हैं।
  • यह निर्णय सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही संयुक्त जांच समिति (जेआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया। 
  • इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर श्री शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करें। पनामागेट मामले की जांच के लिए छह मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया गया था।
  • तय समय सीमा के भीतर जेआईटी ने 10 जुलाई को यह रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। मामले की सुनवाई 21 जुलाई को पूरी हो गयी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
  • गौरतलब है कि पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले में नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के नाम का खुलासा होने के बाद से ही पाकिस्तान में विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद से शरीफ को हटाये जाने की मांग हो रही थी।
  • पनामा की विधि फर्म मोजैक फोंसेका के लीक हुए टैक्स दस्तावेजों से दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों के नाम हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबियों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (दोषी करार), मिस के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो, लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी समेत कई हस्तियों के नाम हैं।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के परिवार का ऑफशोर खातों से संबंध है।
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पिता का भी इसी तरह के खातों से संबंध है। इसके अलावा करीब 500 भारतीय हस्तियों के नाम भी पनामा पेपर्स में हैं।

2. पाकिस्तान में अस्थिरता से बढ़ेगी भारत की चिंताएं


  • पनामागेट’ कांड में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद उपजे माहौल पर भारत भी सतर्क नजर बनाए हुए है।
  • पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने और वहां सेना के हस्तक्षेप में और अधिक वृद्धि होने के आसार से भारत चिंतित भी है। भारत की आशंका है कि वहां की अस्थिरता कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठनों को नई ऊर्जा दे सकती है।
  • ऐसे में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। सभी एजेंसियों को खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में चाक चौबंद रहने का निर्देश दिया गया है।1विदेश मंत्रलय के एक अधिकारी नवाज शरीफ के पद से हटने के बाद उपजे हालात को तीन वजहों से भारत के लिए चिंता का कारण बताते हैं। सबसे अहम तो यह है कि मजबूत राजनीतिक नेतृत्व न होने से पाक सेना बेलगाम होगी।
  • वहां पहले से सेना शक्तिशाली है, लेकिन अब वह और अधिक आक्रामक हो सकती है। पाकिस्तानी सेना किसी सूरत में भारत के साथ बेहतर रिश्तों को बर्दाश्त नहीं कर सकती। दूसरी वजह यह है कि अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल भारत विरोधी तेवरों को और तल्ख कर सकते हैं।
  • इस वजह से भारत विरोधी आतंकी संगठनों मसलन जैश-ए-मोहम्मद या तहरीक-ए-आजादी (जमात का नया संगठन) को वहां अपनी गतिविधियों को और बढ़ाने का मौका मिल सकता है। तीसरी वजह यह है कि पाक सेना कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने की नई कोशिश कर सकती है।
  • विदेश मंत्रलय के मुताबिक भारत की तात्कालिक चिंता पाकिस्तानी सेना की तरफ से बंदी बनाए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को लेकर है। सेना की अपीलीय कोर्ट उनके आवेदन को ठुकरा चुकी है। अब उन्होंने सेना प्रमुख कमर बाजवा के पास गुहार लगाई है। वैसे इस मामले की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी चल रही है, लेकिन पाक सेना का कोई भरोसा नहीं है। सेना के दबाव में ही शरीफ सरकार को पठानकोट हमले की जांच रिपोर्ट को दबाना पड़ा था।
  • पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सुधारने की अगर कोई बची खुची उम्मीद थी तो अब उसके भी खत्म होने के आसार हैं। पठानकोट व उड़ी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तल्खी बढ़ी है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब करने की लगातार कोशिश कर रहा है, जबकि सीमा पार से भी कश्मीर में आतंक को बढ़ावा देने की हर मुमकिन कोशिश हो रही है।
  • विदेश मंत्रलय के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘भारत पाकिस्तान में जल्द ही एक मजबूत लोकतांत्रिक सरकार के गठन की उम्मीद करेगा। पाक सेना के साये में रिश्ते सुधारने की बात बेमानी है।’ पाकिस्तान में उथलपुथल का हमेशा भारत पर किसी न किसी स्तर पर पड़ता है।
  • वहां के राजनेता और सेना को भी अक्सर घरेलू मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ मोर्चा खोलना अधिक मुफीद लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार भी ऐसा कुछ हो सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि भारत पहले से सतर्कता बरते।

3. डोकलाम तनाव के बीच राष्ट्रपति जिनपिंग से मिले डोभाल


  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल शुक्रवार को यहां ब्रिक्स देशों के दूसरे शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले। सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में चीन और भारत के बीच जारी तनातनी के बीच यह बैठक हुई।
  • कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर दिनभर चले विचार विमर्श के बाद ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के एनएसए शी से मिले और बातचीत की।
  • चीन ने बृहस्पतिवार को कहा था कि डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जीइची ब्रिक्स एनएसएस बैठक से इतर मिले और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर र्चचा की। हालांकि चीन ने डोकलाम में जारी तनातनी का कोई उल्लेख नहीं किया।
  • 16 जून को तनातनी शुरू होने के बाद से चीन लगातार कहता आया है कि भारतीय सैनिकों की बिना किसी शर्त वापसी के बगैर कोई सार्थक बातचीत नहीं होगी। बैठक में चीनी अधिकारियों तथा ब्रिक्स देशों के एनएसए ने मीडिया के सामने हाथ नहीं मिलाएं।

4. सहयोग बढ़ाएंगे ब्रिक्स देशों के राजस्व विभाग


  • ब्रिक्स देशों के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने समूह के सदस्य देशों के बीच कर मामलों में सहयोग के क्षेत्रों की पहचान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समूह ने भारत में हाल में लागू नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की तारीफ की है।
  • वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि ब्रिक्स में शामिल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राजस्व विभाग के प्रभारी अधिकारियों एवं कर विशेषज्ञों की बैठक चीन के हांगझोउ में 25 से 27 जुलाई के बीच हुई। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने किया।
  • मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक में कर सहयोग के क्षेत्रों की पहचान के लिए एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • सहयोग के इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग, क्षमता निर्माण, अनुभव साझा करना और एक दूसरे के राजस्व विभाग के प्रमुख अधिकारों के बीच नियमित संपर्क की व्यवस्था करना शामिल हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों ने भारत के जीएसटी सुधारों की प्रशंसा की है।

5. चीन से तनातनी के बीच सैन्य रिश्तों को नई धार देंगे भारत व अमेरिका


  • चीन जिस तरह से सीमा विवाद को लेकर भारत से भिड़ा हुआ है, ठीक उसी तरह से अमेरिका के साथ भी उसके रिश्ते दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका के सैन्य संबंधों में नई गर्माहट आने के संकेत हैं।
  • कुछ ही दिन पहले भारत और अमेरिका ने जापान के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में अभी तक का सबसे बड़ा नौ सेना अभ्यास किया था। अब भारत और अमेरिका की वायु सेनाओं के बीच युद्धाभ्यास होने जा रहा है।
  • अमेरिका-भारत के सैन्य रिश्तों पर ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिनों संयुक्त रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे वहां की कांग्रेस में पेश किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर मदद कर रहा है।
  • इसमें सैन्य आयुधों की आपूर्ति से लेकर अत्याधुनिक तकनीक के हथियारों व इनसे जुड़ी तकनीक को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शामिल है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर हथियारों का बड़ा प्रोजेक्ट लगाने को तैयार है।
  • अमेरिका ने सैन्य उत्पादों से जुड़े उद्योगों के लिए भारत की निर्यात संबंधी दिक्कतों को भी दूर कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत को एक अहम रक्षा साझेदार घोषित किया है, लेकिन अब इसे अमल में लाने की जिम्मेदारी विदेश, रक्षा व वाणिज्य मंत्रालय की है।
  • ओबामा प्रशासन ने भी जून, 2016 में भारत को अहम साझेदार घोषित किया था। रिपोर्ट के कई अंश हैं जो भारत व अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के लिए चल रहे कामों की गंभीरता को बताते हैं। मसलन, 2012 से दोनों देश रक्षा तकनीक व कारोबार के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्य समूह काम कर रहे हैं।
  • ये कार्य दल अलग अलग क्षेत्रों (एयरक्राफ्ट कैरियर्स, जेट इंजन, रसायन व जैविक युद्ध की स्थिति में बचाव के उपाय) में स्थापित किए गए हैं। इस कार्यदल की कोशिशों की वजह से भारत को रडार, गैस टरबाइन इंजन, नाइट विजन जैसी तकनीक हासिल हो चुकी है।
  • भारत अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के सहयोग से बना रहा है। जानकारों की मानें तो जिस समय अमेरिकी प्रशासन ने यह रिपोर्ट पेश की है, वह अहम है। रिपोर्ट में हिन्द व प्रशांत महासागर का भी कई बार उल्लेख है। ये बातें भारत के पड़ोसी देश को नागवार गुजरेगी।

6. लोस में आईआईएम विधेयक को मंजूरी : अब बोर्ड चुनेगा आईआईएम अध्यक्ष व निदेशक


  • लोकसभा में शु्क्रवार को आईआईएम (भारतीय प्रबंध संस्थान) विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी गयी। विधेयक में आईआईएम संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है, जिसमें पर्याप्त जवाबदेही भी होगी।
  • विधेयक में जिस ढांचे का प्रस्ताव है उसमें इन संस्थानों का प्रबंधन बोर्ड से संचालित होगा, जहां संस्थान के अध्यक्ष और निदेशक बोर्ड द्वारा चुने जाएंगे। इस विधेयक में ऐसे प्रावधान है कि आईआईएम अब अपने छात्रों को डिग्री दे सकेंगे।
  • सोसायटी होने के कारण प्रतिष्ठित आईआईएम वर्तमान में डिग्री देने को अधिकृत नहीं हैं और प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा और फेलो प्रोग्राम की डिग्री देते हैं। हालांकि इन पाठ्यक्रमों को कमश: एमबीए और पीएचडी के बराबर माना जाता है, लेकिन समानता वैश्विक रूप से स्वीकार्य नहीं है, खासकर फेलो प्रोग्राम के लिए।
  • सदन में बिल पर र्चचा के बाद सदस्यों के सवालों का जवाब देने के क्रम में आईआईएम में फीस और आरक्षण के विषय पर विपक्ष की चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह विधेयक आईआईएम को कितनी अधिक स्वायत्तता प्रदान करने जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब मैं कौंसिल का चेयरमैन नहीं रहूंगा। उन्होंने कहा कि अब सच्चे, ईमानदार और प्रतिभावान छात्र दाखिले से वंचित नहीं होंगे। साथ ही आईआईएम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरने के बारे में विशिष्ठ निर्देश दिये गए हैं।
  • जावड़ेकर ने कहा कि यह ऐतिहासिक बिल है और हम नए युग की ओर जा रहे हैं। सदन में भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक 2017 पर र्चचा का जवाब देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि कुछ सदस्यों ने फीस और आरक्षण के मुद्दे को उठाया है।
  • उन्होंने कहा कि कोई भी छात्र जो गुणवत्ता के आधार पर दाखिला लेना चाहता है, उसके लिए फीस कोई मुद्दा नहीं होगा। इस दिशा में मेधा आधारित छात्रवृत्ति, सीखो और कमाओ, ऋण योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए आरक्षण तो है।
  • पिछले सप्ताह एक विशिष्ठ निर्देश जारी किये गए थे और यह कहा गया था कि संस्थान में अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरा जाए। इस तरह से हम लगातार पहल कर रहे हैं।
  • जावड़ेकर ने कहा कि उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी के जरिए हमने शोध और आधारभूत ढांचे को उन्नत बनाने के लिए कोष जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मकसद भारत में विश्व स्तरीय शोध सुविधा सृजित करना है। इस संबंध में पहला आवेदन इसी महीने मंजूर होगा।
  • हमारा लक्ष्य अगले तीन वर्षो में तीन अरब डालर का निवेश जुटाने का है ताकि अनुसंधान एवं शोध के लिये विश्व स्तरीय शोध आरधारभूत ढांचे का विकास किया जा सके।
  • मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता बेहतरी कार्यक्रम के तहत तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए वित्त पोषण का कार्यक्रम तैयार किया गया है।
  • इस योजना में अभी जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर के राज्यों, अंडमन निकोबार द्वीपसमूह, ओडिशा, झारखंड, बिहार, राजस्थान शामिल होंगे।
  • उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए हमने दुनिया के जाने माने शिक्षकों, विद्वानों को जोड़ने की पहल की है।

7. विदेशी मुद्रा भंडार 391 अरब डालर के नए रिकार्ड स्तर पर पहुंचा


  • देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज हुई। गत 21 जुलाई को समाप्त सप्ताह में यह 2.27 अरब डालर बढ़कर 391.33 अरब डालर के नए रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया।
  • इससे पहले 14 जुलाई को समाप्त सप्ताह में यह 2.68 अरब डालर बढ़कर 389.06 अरब डालर के अब तक के रिकार्ड स्तर पर रहा था।
  • रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में 2.23 अरब डालर की बड़ी बढ़ोतरी के कारण विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है।
  • गत 21 जुलाई को विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 367.14 अरब डालर पर रही। स्वर्ण भंडार 20.35 अरब डालर पर लगभग स्थिर रहा।
  • इस बीच आईएमएफ के पास आरक्षित निधि दो करोड़ डालर बढ़कर 2.34 अरब डालर पर और विशेष आहरण अधिकार एक करोड़ डालर बढ़कर 1.49 अरब डालर पर पहुंच गया।

8. चौंकाने वाली कैग रिपोर्ट : फंसे कर्ज वसूली से ज्यादा माफ कर रहे हैं बैंक


  • सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या अनुमान से कहीं अधिक गंभीर है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फंसे की वास्तविक राशि को कम करके दिखा रहे हैं।
  • करीब दर्जन भर सरकारी बैंक ऐसे हैं जिन्होंने अपने फंसे कर्ज की राशि रिजर्व बैंक के अनुमान की तुलना में 15 प्रतिशत तक कम बतायी है।
  • हकीकत यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की राशि को वसूलने से ज्यादा माफ कर रहे हैं।1बैंकों की स्थिति के बारे में यह चौंकाने वाला तथ्य नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है जिसे वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया।
  • कैग ने यह रिपोर्ट ‘सरकारी क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण’ का ऑडिट करने के बाद तैयार की है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया किया गया है कि बैंक अपने बलबूते बाजार से पूंजी जुटाने में नाकाम रहे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वर्ष 2018-19 तक 1,10,000 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का लक्ष्य दिया था। हालांकि इस लक्ष्य के मुकाबले बैंक जनवरी 2015 से मार्च 2017 के दौरान मात्र 7,726 करोड़ रुपये ही बाजार से जुटा पाए।
  • कैग ने 2019 तक बाकी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी बाजार से जुटाने की बैंकांे की क्षमता पर आशंका भी जतायी है।
  • कैग रिपोर्ट में सबसे अहम बात जो सामने आयी है, वह यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की वसूली करने की तुलना में इसे माफ अधिक कर रहे हैं। सरकारी बैंकों ने वर्ष 2011-15 के दौरान भारी भरकम 1,47,527 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज माफ किये जबकि सिर्फ 1,26,160 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी।
  • रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज की राशि तीन साल में बढ़कर तीन गुना हो गयी। मार्च 2014 में बैंकों का सकल एनपीए 2.27 लाख करोड़ रुपये था जो मार्च 2017 में बढ़कर 6.83 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • हालांकि इससे चौंकाने वाली बात यह है कि कई सरकारी बैंक अपनी एनपीए की वास्तविक राशि नहीं दिखा रहे हैं। सरकारी बैंक एनपीए की राशि को कम करके दिखा रहे हैं।
  • कैग रिपोर्ट के अनुसार दर्जन भर सरकारी बैंकों ने अपना जितना एनपीए बताया, वह आरबीआइ के अनुमान से 15 प्रतिशत कम था। 1कैग ने सरकार की ओर से बैंकों को दी गयी पूंजी की प्रक्रिया में भी कई तरह की खामियां उजागर की हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार बैंकों को जो पूंजी दे रही है, उसका उपयुक्त इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र होना चाहिए।

9. हेपेटाइटिस मुक्त होगा देश, अटल के जन्मदिन पर शुरू होगा एक्शन प्लान


  • घातक बीमारी हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी को जड़ से खत्म करने के लिए दुनियाभर में पहल हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार भी हेपेटाइटिस सी के संक्रमण को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय एक्शन प्लान तैयार कर रही है।
  • आगामी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सरकार उस एक्शन प्लान को देशभर में लागू करेगी। यह बातें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कही।
  • वह शुक्रवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एक साल में देश को हेपेटाइटिस सी से मुक्त करने का एलान किया।
  • उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस ए व हेपेटाइटिस ई की बीमारी दूषित पानी की वजह से होती है। इनके इलाज के लिए सरकार मरीजों को अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध करा रही है।
  • हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए डेढ़ महीने में राष्ट्रीय एक्शन प्लान तैयार हो जाएगा। इस एक्शन प्लान को 25 दिसंबर को देशभर में लागू किया जाएगा। देश में करीब 60 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। एक साल में इस बीमारी को खत्म किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू होने पर हेपेटाइटिस सी की दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिये बजट उपलब्ध कराएगी।
  • आइएलबीएस में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रलय के अधिकारी, डब्ल्यूएचओ आदि के विशेषज्ञ शामिल हुए। इसमें देश को हेपेटाइटिस बी व सी से मुक्त करने पर चर्चा हुई।

10. उत्तराखंड में ‘शिखर’ पर बाघ


  • 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में बाघ ‘शिखर’ पर हैं। कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में इनका कुनबा खूब फल-फूल रहा है तो अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी बाघों ने दस्तक दी है। 12 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर अस्कोट, केदारनाथ और खतलिंग में इनकी मौजूदगी के पुष्ट प्रमाण मिले हैं।
  • ये इस बात का द्योतक है कि यहां बाघों के लिए हर स्तर पर बेहतर वासस्थल हैं, जिसे बनाए रखने में राज्य सफल रहा है। बावजूद इसके तस्वीर का दूसरा पहलू भी है और वह है इनकी सुरक्षा की चुनौती। महकमा भी इसी चिंता में घुला जा रहा है।
  • अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उन स्थानों पर अधिक कैमरा ट्रैप लगाने की तैयारी है, जहां पूर्व में इनकी तस्वीरें कैद हुई हैं।1वन विभाग के पास उपलब्ध रिकार्ड को खंगालें तो उत्तराखंड में 1943 में सबसे पहले 6948 फुट की ऊंचाई पर चकराता के खंडबा में बाघ (टाइगर) की मौजूदगी मिली थी। तब बाघ ने वहां हमले भी किए थे।
  • इसे छोड़ पहाड़ अथवा उच्च हिमालयी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं था। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। बाघों ने उच्च हिमालयी क्षेत्र में उन स्थानों पर दस्तक दी है, जहां हिम तेंदुओं का बसेरा है।
  • पिछले तीन वर्षो के अंतराल में करीब साढ़े 12 हजार फुट की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ के अस्कोट क्षेत्र में लगे कैमरों में बाघों की तस्वीर तीन बार कैद हुई तो केदारनाथ सेंचुरी के मदमहेश्वर में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर हिम तेंदुओं के वासस्थल में भी बाघ की मौजूदगी मिली है। 12139 फुट की ऊंचाई वाले खतलिंग ग्लेशियर में भी बाघों की तस्वीरें कैमरा ट्रैप में आई हैं।
  • बाघों के उच्च शिखरों तक पहुंचने से वन्यजीव प्रेमियों के साथ ही वन महकमा उत्साहित जरूर हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा की चिंता भी सालने लगी है। फिर यह बेवजह भी नहीं है। कारण राज्य के बाघ पहले ही शिकारियों व तस्करों के निशाने पर हैं।
  • खासकर कुख्यात बावरिया गिरोह ने नींद उड़ाई हुई है। ऐसे में अब बाघों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

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