Friday, July 14, 2017

Hindi Study Notes - Goods and Service Tax (GST)

UPSC Free Hindi Study materials GST
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष, व्यापक, बहुस्तरीय, मूल्य-वर्धित, गंतव्य आधारित कर है।


  • "अप्रत्यक्ष कर" से तात्पर्य वे कर, जो विवर्तित किये जा सकतें हैं अर्थात दूसरे पर टाले जा सकतें हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो कर लगाया किसी और पर जाता है (कराघात) तथा उस कर का अंतिम रूप से वहन कोई और करता है(करापात)।
  • जीएसटी "व्यापक" इस दृष्टि से है कि इसमें केंद्र, राज्य तथा स्थानीय स्तर के लगभग सभी अप्रत्यक्ष कर समाहित कर दिया गया है तथा इसे पूरे भारत में एकसमान स्तर पर लागू किया गया है। इसमें केंद्र के केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवाकर,अतिरिक्त सीमाशुल्क सहित 7 अप्रत्यक्ष कर, राज्यों के विक्री(व्यापार /VAT), मनोरंजन,विलासिता,विज्ञापन, स्टांप ड्यूटी, लाटरी सहित 8 अप्रत्यक्ष कर, स्थानीय स्तर पर चुंगी सहित 2 अप्रत्यक्ष कर जीएसटी में समाहित कर दिया गया है। इसप्रकार इन 17 अप्रत्यक्ष करों के अलावा 23 अधिभार(सेस) को समाप्त कर एक जीएसटी पूरे भारत में लागू कर दिया गया है। परंतु शराब,पेट्रोलियम, विद्युत जैसी वस्तुएँ राज्य की एक बहुत बड़ी आय का स्रोत होने के कारण राज्यों के विरोध की वजह से फिलहाल जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है तथा भविष्य में इसे जीएसटी के दायरे में लाने का अधिकार जीएसटी परिषद् को दिया गया है। सामाजिक हित में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं को भी फिलहाल जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है।
  • "बहुस्तरीय" से तात्पर्य जीएसटी कच्चे माल के खरीद से लेकर, निर्माण/विनिर्माण, थोक विक्री,फुटकर विक्री तक सभी स्तर पर लगेगा।
  • "मूल्य वर्धित कर" से तात्पर्य प्रत्येक स्तर पर टैक्स वस्तु के पूरी कीमत पर नहीं बल्कि उसमें जो मूल्य बढेगा उसी पर लगेगा।
  • "गंतव्य आधारित" कर से तात्पर्य जीएसटी अंतिम रूप से वहाँ वसूला जायेगा जहाँ उस वस्तु या सेवा की अंतिम पूर्ति होगी या अंतिम रूप से उपभोक्ता खरीदेगा तथा जीएसटी का लाभ भी उसी राज्य को प्राप्त होगा जहाँ अंतिम रूप से विक्री होगा या उपभोग होगा।

अब प्रश्न उठता है कि भारत में जीएसटी लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी???

जीएसटी लागू करने के मुख्यतः तीन कारण है:


  1. राज्यों तथा केंद्र द्वारा अलग-अलग कर वसूलने के कारण कर के ऊपर कर लगता था, जिसे कास्केडिंग इफेक्ट कहा जाता है। जीएसटी लागू होने से यह समस्या समाप्त हो गयी।
  2. वस्तु एवं सेवाकर अलग-अलग होने के कारण कई बार इसपर दोनों कर वसूला जाता था। जीएसटी लागू होने से दोहरा कर वसूली समाप्त हो गया।
  3. विभिन्न राज्यों में वस्तुओं पर लगने वाली कर की दर अलग-अलग थी, जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में समान कर की दर लागू हो गयी है।

इस पूरी प्रक्रिया को एक उदाहरण द्वारा समझने का प्रयास करतें हैं। उदाहरण के तौर पर एक पुस्तक के निर्माण, छपाई, विक्री आदि तक चार चरण को लेतें हैं।

पहला चरण:


  • एक उद्यमी 100₹ का कच्चा माल लुगदी के रूप में खरीदता है तथा इस पर 12% की दर से जीएसटी 12 ₹ (6₹ SGST तथा 6₹ CGST) देता है। इस प्रकार 112₹ में उद्यमी ने लुगदी खरीदा ।

दूसरा चरण:


  • इसे निर्माण/विनिर्माण द्वारा 50₹ पुस्तक का रूप देने, 50₹ छपाई, 38₹ लेखक को रायल्टी, 50₹ उद्यमी का लाभ आदि सभी जोड़कर पुस्तक का मूल्य 300₹ (112+50+50+38+50) आता है।जीएसटी 12% लगने पर टैक्स आयेगा 36₹, लेकिन इस उद्यमी ने पहले ही 12₹ जीएसटी लुगदी खरीदते समय ही दे चुका है इसलिए उसे 12₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा वह जीएसटी 36₹-12₹=24₹(12₹SGST+12₹CGST) चुकाएगा। इसप्रकार वह पुस्तक को 324₹ में थोक विक्रेता को देगा।

तीसरा चरण:


  • थोक विक्रेता यदि अपने परिवहन लागत+लाभ को 26₹ रखता है तो वह फुटकर विक्रेता को पुस्तक 350₹ में देगा। यदि जीएसटी 12% लगती है तो टैक्स हुआ 42₹, परंतु इस पुस्तक पर 36₹(12₹+24) पहले ही जीएसटी दिया जा चुका है अत: थोक विक्रेता को 36₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा जीएसटी 42₹-36₹=6₹(3₹SGST+3₹CGST)ही देगा। इसप्रकार थोक विक्रेता फुटकर विक्रेता को यह पुस्तक 356₹ में देगा।

चौथा चरण :


  • यदि फुटकर विक्रेता अपने परिवहन लागत +लाभ को 44₹ रखता है तो एक छात्र को वह पुस्तक 400₹ में देगा। इसपर जीएसटी 12% लगता है तो जीएसटी हुआ 48₹, परंतु इससे पहले 12₹+24₹+6₹ =42₹ जीएसटी दिया जा चुका है इसलिए फुटकर विक्रेता को 42₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा उसे 48₹-42₹=6₹(3₹SGST+3₹CGST) देना पड़ेगा।

आइए देखतें हैं यह उदाहरण जीएसटी की परिभाषा तथा शर्तों पर कहां तक फिट बैठता है:


  • अप्रत्यक्ष कर है,क्योंकि उद्यमी अपने ऊपर लगने वाले कर को पुस्तक के मूल्य में जोड़कर थोक विक्रेता पर, थोक विक्रेता अपने ऊपर लगने वाले कर को पुस्तक के मूल्य में जोड़कर फुटकर विक्रेता पर तथा फुटकर विक्रेता अपने ऊपर लगने वाले कर को अंतिम रूप से खरीदने वाले उपभोक्ता छात्र पर डाल दिया।
  • व्यापक है क्योंकि जीएसटी में उत्पाद शुल्क,विक्री कर, रायल्टी के रूप में सेवाकर आदि सभी समाहित हो गया तथा पूरे भारत में एकदर से लगा।
  • बहुस्तरीय है क्योंकि कच्चेमाल से लेकर,निर्माण/विनिर्माण, थोक, फुटकर आदि सभी स्तरों पर लगा।
  • मूल्य वर्धित कर है क्योंकि जीएसटी केवल उसी मूल्य पर लगा जो प्रत्येक स्तर पर बढ रहा है। जैसे 12% की दर से जीएसटी पहले स्तर पर मूल्य 100₹ है तो जीएसटी 12₹, दूसरे स्तर पर मूल्य में वृद्घि 200₹ हुआ तो जीएसटी 24₹, तीसरे चरण में मूल्य में वृद्घि 50₹ हुआ तो जीएसटी 6₹, चौथे चरण में मूल्य वृद्घि 50₹ हुआ तो जीएसटी 6₹ लगा।
  • गंतव्य आधारित कर है क्योंकि पहले से लेकर अंतिम चरण तक लगने वाला समस्त जीएसटी पुस्तक के मूल्य में जुड़ता चला गया तथा इसे अंतिम रूप से उपभोग करने वाला अर्थात् पूर्ति के अंतिम चरण उपभोक्ता द्वारा चुकाया गया। पुस्तक का निर्माण चाहे जिस राज्य में हुआ हो परंतु जीएसटी का लाभ उस राज्य को मिलेगा जहाँ यह अंतिम रूप से उपभोग हुआ हो। इसी आधार पर गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु जैसे बड़े पैमाने पर उत्पादक राज्यों ने विरोध किया था।

पहले से अंतिम चरण तक जीएसटी कहीं भी कर के ऊपर कर नहीं लगा अर्थात् कास्केडिंग इफेक्ट से कर प्रणाली मुक्त हो गया।


  • वस्तु तथा सेवाकर एक हो जाने से दोहरा कराधान से मुक्ति मिली।
  • विभिन्न राज्यों में विक्रीकर (व्यापार कर/ VAT) की अलग-अलग दरों के बजाय पूरे देश में समान कर लागू हो गया।

जीएसटी की दरें :


  • जीएसटी के तहत कुल 1211वस्तुओं तथा सेवाओं को पाँच टैक्स स्लैब के तहत रखा गया है। 81% वस्तुएँ 18% या इससे कम दर पर हैं। केवल 19% वस्तुएँ ही 28% टैक्स स्लैब के अंतर्गत शामिल हैं।

1) 0%


  • इसके तहत बिना ब्रांड का आटा, चावल, नमक, दूध, मैदा, बेसन, अनाज, पशुओं का चारा जैसे मूलभूत जीवन उपयोगी वस्तुओं को रखा गया है।

2) 5%


  • इसके तहत चीनी, चायपत्ती, दवाईयाँ, 500₹ तक के जूते, 1000₹ तक के कपडे़, लोहे व इस्पात के समान आदि शामिल है।

3) 12%


  • इसके तहत मक्खन, घी, बादाम, पेन, किताबें, खेल के सामान तथा मोबाइल आदि शामिल है।

4) 18%


  • इसके तहत साबुन, टूथपेस्ट, हेयरआयल, आइस्क्रीम,कम्प्यूटर, बीमा आदि शामिल है।

5) 28%


  • इसके तहत शैंपू, पानमसाला,तंबाकू, चाकलेट,एसी, फ्रीज, कार, डिजिटल कैमरा आदि शामिल है।

कौन होगा GST में शामिल 


  • जीएसटी के तहत केवल वही कारोबारी आयेंगे जिनका वार्षिक टर्नओवर 20 लाख ₹ से अधिक है (विशेष राज्यों में 10 लाख ₹)। ऐसे व्यापारियों को 15 डिजिट का जीएसटी पंजीकरण लेना होगा। 50 लाख ₹ तक का वार्षिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को कंपोजिशन स्कीम के तहत 0.5% से 2.5% तक न्यूनतम टैक्स देने की सुविधा दी गयी है।

जीएसटी के प्रकार :

जीएसटी चार प्रकार की है।

  1. CGST अर्थात् केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर
  2. SGST अर्थात् राज्य वस्तु एवं सेवा कर
  3. UTGST अर्थात् संघ शासित राज्य वस्तु एवं सेवा कर
  4. IGST अर्थात् इंटीग्रेटेड वस्तु एवं सेवा कर।
इसमें CGST केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित जीएसटी का 50% वसूलेगा। SGST/UTGST संबंधित राज्य जहाँ व्यापार हो रहा है निर्धारित जीएसटी का 50% वसूलेगा। IGST वास्तव में कोई कर नहीं है बल्कि यह एक अंतरिम व्यवस्था है। जब व्यापार एक राज्य से दूसरे राज्य में होगा तो चूंकि जीएसटी एक गंतव्य आधारित कर है अत: IGST नेटवर्किंग के तहत किसी एक राज्य में चुकाया गया इन्पुट टैक्स क्रेडिट उस राज्य को स्वत: हस्तांतरित हो जायेगा जहाँ वस्तु या सेवा की अंतिम पूर्ति होगी या जिस राज्य में खरीदा जायेगा।

जीएसटी के फायदे :


  • कर व्यवस्था आसान होगी तथा कर के ऊपर कर (कास्केडिंग इफेक्ट ) से मुक्ति मिलेगी।
  • NCAR के अनुसार देश के जीडीपी में 2-3% की वृद्घि होगी।
  • मूलभूत आवश्यक उत्पादों तथा वस्तुओं की कीमत घटेगी।
  • पूरा ढाँचा आनलाईन होने की वजह से कर चोरी रूकेगी तथा पारदर्शिता बढेगी।
  • पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो जायेगा तथा एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर का लक्ष्य पूरा होगा।
  • वस्तुओं तथा सेवाओं के लागत में कमी आयेगी।
  • अंतर्राज्यीय व्यापार आसान होगा तथा गतिशीलता में तेजी आयेगी।
  • सभी राज्यों को निवेश के समान अवसर प्राप्त होंगें।
  • निर्यात पर कर की दर शून्य हो जायेगी जिससे मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं को बल मिलेगा।
  • इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी।

जीएसटी के नुकसान :


  • जीडीपी का लगभग 60% सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आता है जिसकी दर 14.5% से बढाकर 18% कर दिया गया है जिससे सेवाएँ मँहगी होंगी।
  • कुछ राज्यों के आय में कमी आयेगी।
  • कई राज्यों के आय का प्रमुख स्रोत शराब, पेट्रोलियम आदि है जब इन वस्तुओं को जीए
  • सटी के दायरे में लाया जायेगा तो राज्यों को भारी नुकसान होगा तथा राज्यों की केंद्र पर निर्भरता बढेगी। स्थिति तब ज्यादा गंभीर होगी जब केंद्र व राज्य में अलग-अलग दल की सरकारें होंगी।

चुनौतियां :


  • अनुकूल व्यवस्था का अभाव
  • प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी
  • कर चोरी के संबंध में स्पष्ट तथा प्रभावी तंत्र की कमी
  • जीएसटी के प्रभाव के सही आकलन करने में कठिनाई ।

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अर्थशास्त्र ( Economics) - GST - Goods & Service Tax - Basic Lecture - 11


GST का भारत में इतिहास 


  • 1st जुलाई 2017 से भारत जीएसटी लागू करने वाला विश्व का 166वाँ देश बन गया । सर्वप्रथम जीएसटी 1954 ई0 में फ्रांस ने लागू किया था। भारत का जीएसटी कनाडा माॅडल पर आधारित है।भारत में जीएसटी लागू करने का प्रथम प्रयास 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रयास किया था। 
  • उस समय पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्तमंत्री असीमदास गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया जिसने जीएसटी माॅडल तैयार किया। वर्ष 2003 में अप्रत्यक्ष कर सुधार हेतु विजय केलकर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया जिसने जीएसटी लागू करने की सिफारिश की। 12 वें वित्त आयोग ने भी अप्रत्यक्ष करों में सुधार हेतु जीएसटी लागू करने का सुझाव दिया। 
  • वर्ष 2006 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ने 1अप्रैल 2010 से जीएसटी लागू करने की घोषणा की परंतु विभिन्न राज्यों के विरोध की वजह से इसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका। भारत में जीएसटी लागू करने के लिए 122वाँ संविधान संशोधन 2014 लाया गया। जिसे राज्यसभा ने 3 अगस्त 2016 तथा लोकसभा ने 8अगस्त 2016 को पारित किया। राज्यों में जीएसटी सर्वप्रथम असम विधानसभा ने पेश किया तथा सबसे पहले तेलंगाना विधानसभा ने पास किया। 
  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा जीएसटी पारित करने वाला अंतिम राज्य है। 8सितंबर 2016 को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद इसे 101वाँ संविधान संशोधन 2016 के रूप में मान्यता मिली। जीएसटी लागू करने के लिए संविधान के 6वीं तथा 7वीं अनुसूची में संशोधन करना पडा़ तथा अनुच्छेद-246A, अनुच्छेद-268A, अनुच्छेद-279A जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद-279A के तहत जीएसटी परिषद् का गठन किया गया है जिसमें 33 सदस्य शामिल हैं। इसका अध्यक्ष केंद्रीय वित्तमंत्री होंगें। एक आईएएस अधिकारी को संयुक्त सचिव, सभी 29 राज्यों तथा 2 केंद्रशासित प्रदेश जहाँ विधानसभा है के मुख्यमंत्रियों द्वारा नियुक्त एक-एक सदस्य शामिल होगा। एक एंटी प्रोफिटियरिंग अथारिटी का गठन भी किया गया है जो इन्पुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने पर सजा का प्रावधान किया गया है।
  • यदि कोई व्यापारी जीएसटी की चोरी करता है तो उसे पाँच वर्ष के लिए कारावास का प्रावधान है। एक जीएसटी कोष की स्थापना भी की गई है जो जीएसटी लागू होने पर राज्यों को होने वाली हानि का 100% अगले पाँच वर्ष तक केंद्र सरकार द्वारा इस कोष से देने का प्रावधान किया गया है। जीएसटी नेटवर्किंग के सफलता पूर्वक क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एन. नारायणमूर्ति की कंपनी इन्फोसिस को दिया गया है|

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