Friday, June 10, 2016

UPSC-अर्थशास्त्र( Economics)-Types of Economies अर्थव्यवस्था के प्रकार-Lecture-4

अर्थव्यवस्था के प्रकार( Types of Economies) 

आज की क्लास में हम अर्थव्यवस्था के प्रकार( types of economies) के बारे में पढ़ेंगे। देखिये पूरी दुनिया में लोग केवल धर्म, जाति, रंग या क्षेत्र के आधार पर ही नही बँटे हुए हैं, बल्कि एक आधार और है। और वह है विचारधारा। तथा विचारधारा के आधार पर ही अर्थव्यवस्था को बांटा गया है। अगर वैश्विक स्तर पर बात करें तो अर्थव्यवस्था के तीन प्रकार हैं------
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था( Capitalist economy)
  • समाजवादी अर्थव्यवस्था( Socialist economy)
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था( Mixed economy)

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था( Capitalist Economy)

  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था Capitalist economy-- इसके अन्तर्गत अर्थव्यवस्था में मुख्य भूमिका निजी क्षेत्रों के द्वारा निभाई जाती है( In the capitalist economy major role is played by private sectors)।
  • जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व पाया जाता है तथा वस्तुओ और सेवाओं का उत्पादन निजी लाभ के लिया किया जाता है उसे पूंजीवादी अर्थव्यवस्था कहा जाता है पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को निजी, स्वतंत्र, अहस्तक्षेप तथा बाजारीय अर्थव्यवस्था के नाम से भी जाना जाता है -
  • अर्थात उत्पादन की गतिविधियों में निजी क्षेत्रों की भूमिका अत्यधिक होती है। पूंजीवाद के अंतर्गत दो बातो पर ध्यान दिया जाता है- पहला उत्पादन अधिक हो तथा दूसरी profit अधिक हो। देखिये हम लोग जानते हैं कि कोई भी प्राइवेट कम्पनी हमेशा लाभ को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए कार्य करती है। इसे ऐसे समझते है अगर कोई कंपनी पेन बनाती है तथा एक पेन बनाने पर 2 rs कमाती है तो 5 पेन बनाने पर अधिक लाभ कमाएगी। मतलब पूंजीवाद में उत्पादन एवम् लाभ पर अत्यधिक ध्यान दिया जाता है। इसके कुछ उदहारण हैं--- America, canada, japan, s. Korea, european countries etc.

समाजवादी अर्थव्यवस्था( Socialist Economy)

  • Socialist economy- आइये अब समाजवादी अर्थव्यवस्था के बारे में जानते है। सबसे पहले इसकी भी परिभाषा समझते है-- समाजवादी अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत उत्पादन की क्रिया में मुख्य भूमिका सार्वजनिक क्षेत्रों के निभाई जाती है( In the socialist economy major role is played by public sectors)।
  • जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादनों के साधनों पर सरकार(समाज) का स्वामित्व होता है तथा वस्तुओ और सेवाओं का उत्पादन समाज कल्याण के लिए होता है इसे साम्यवादी तथा जनवादी अर्थव्यवस्था के नाम से भी जाना जाता है
देखिए इसके अंतर्गत राज्य के द्वारा वितरण(distribution) एवं कल्याण( welfare) पर ध्यान दिया जाता है। अर्थात राज्य स्वम् उत्पादन करता है तथा लोगो की आवश्यकता तथा क्रय शक्ति के आधार पर वितरण करता है। यह वितरण कही न कही कल्याण से जुड़ा होता है, मतलब लोगो को उस दाम पर उत्पाद उपलब्ध कराना जिस पर वे उसे afford कर सकें( जैसे की BPL system, कम दामो पर उत्पाद उपलब्धता)।
इसके उदहारण हैं- USSR( आज का रूस), china, north korea.
मुझे लगता है अभी आप समझ गए होंगे। लेकिन यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन की स्थिति आपवादिक मानी जाती है, जैसे की चीन सैद्धांतिक रूप में एक समाजवादी देश(अर्थव्यवस्था) है किंतु व्यवहारिक रूप में यह एक पूंजीवादी देश है। अगर आपकी परीक्षा में प्रश्न आता है कि चीन की अर्थव्यवस्था कैसी है तो आपको समाजवादी मानना होगा।

मिश्रित अर्थव्यवस्था( Mixed Economy)

  • Mixed economy- चलिये आगे बढ़ते हैं ओर मिश्रित अर्थव्यवस्था को समझने का प्रयास करते हैं। देखिये सबसे पहले यह जानते हैं कि इसका नाम mixed economy क्यों पड़ा। दरअसल जब पूंजीवाद एवम् समाजवाद की विशेषताओ को मिला दिया जाता है अर्थात mix कर दिया जाता है तो उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था कहते है। 
  • जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर पूंजीवादी तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था एक साथ पायी जाती है तथा इसमें सामाजिक कल्याण के पीछे लाभ कि भावना होती है उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था कहते है
  • अर्थात अर्थव्यवस्था में निजी एवम् सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों का सह-अस्तित्व होता है( In the mixed economy there is coexistence of both private and public sectors)। इसका सबसे अच्छा उदहारण हमारा अपना देश( सबसे प्यारा सबसे न्यारा☺) भारतवर्ष है।
  • शायद अभी आपको economy के तीनों प्रकार समझ आ गए होंगे

Policy

प्रत्येक देश, चाहे वह किसी भी आर्थिक प्रणाली के अन्तर्गत काम करता है, उसको विभिन्न आर्थिक समस्याओं जैसे गरीबी, धन व आय की असमानता, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति व मन्दी आदि का सामना करना पडता हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए वह विभिन्न नीतियों को अपनाता है अब आगे पढ़ाई करते हैं, तथा नीतिओ के बारे में बात करते हैं। देखिये यहाँ पर हम तीन प्रकार की नीतिओ के बारे में जानेगे----
  1. राजकोषीय नीति(fiscal policy)
  2. मौद्रिक नीति(monetary policy)
  3. विदेश नीति( foreign policy)

1- राजकोषीय नीति(fiscal policy)--:

  • एक वितीय वर्ष में सरकार की आय/प्राप्ति( receipts) तथा व्यय(expenditure) का जो लेखा जोखा तैयार किया जाता है अर्थात नीति बनाई जाती है की कितना खर्च करना है तथा कहा पर। इसी को राजकोषीय नीति कहा जाता है। इसे भारत सरकार का वित्त मंत्रालय बनाता है।

2- मौद्रिक नीति(monetary policy)--: 

  • इसके बारे में हमको डिटेल में बैंकिंग वाले चैप्टर में पढ़ना है। अभी के लिए साधरण भाषा में इतना समझ लीजिये कि समय समय पर अर्थव्यवस्था में आई मंदी और महंगाई को control करने के लिए RBI कुछ नीति जारी करता है, इसी को मौद्रिक नीति कहते हैं। इसे केंद्रीय बैंक RBI के द्वारा तैयार किया जाता है।

3- विदेश नीति( foreign policy)---: 

  • इसे तो आप नाम से ही समझ गए होंगे। इसके अन्तर्गत दूसरे देशों के साथ अच्छे रिश्ते बनाये रखने के लिए कुछ नीतिया बनाई जाती हैं तथा ये समय एवम् परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं।
  • एक चिंतक हैं Hence magenthau उन्होंने foreign policy के बारे में बहुत अच्छी एक लाइन कही है... National interest is the most important element in the foreign policy.
  • इसे ऐसे समझिये आप upsc/uppsc की तैयारी कर रहे हैं तो आपके हित उसके साथ मिलेंगे जो इन्ही की तयारी कर रहा होगा, अर्थात आपकी मित्रता ऐसे व्यक्ति से आसानी से होगी( यहां पर व्यक्ति से मतलब male female दोनो है, bcoz according to IPC sec 8 , male and female both will be considered as person......😊)।

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