Tuesday, June 7, 2016

UPSC-अर्थशास्त्र( Economics)-आर्थिक क्षेत्र (Economic Sectors): Basics-Lecture-3

अर्थशास्त्र ( Economics)-3

आर्थिक क्षेत्र (Economic Sectors)

अर्थशास्त्र की तीसरी कक्षा में आप सभी का स्वागत है। आज की कक्षा में हम आर्थिक क्षेत्र (Economic Sectors) के बारे में पढ़ेंगे।

सबसे पहले आर्थिक क्षेत्र के बारे चर्चा करते हैं। देखिये पूरी दुनिया में अर्थात किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्षेत्रों को तीन भागों में बांटा गया है----

  1. प्राथमिक क्षेत्र (Primary sector)
  2. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary sector)
  3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary sector)

सबसे पहले प्राथमिक क्षेत्र की बात करते है, आगे बढ़ने से पहले आप इसके कुछ उदाहरण देख लीजिये

  • कृषि(Agriculture)
  • खनन (Mining)
  • रेशम उत्पादन (Sericulture)
  • बागवानी (Horticulture)
  • पशुपालन (Rearing)

प्राथमिक क्षेत्र की परिभाषा- 

  • वे सभी गतिविधियाँ जो प्रत्यक्ष रूप में प्रकृति से जुडी हुई होती हैं( All those activities which are directly related to nature)। अर्थात प्राथमिक क्षेत्र में होने वाली गतिविधियाँ प्रकृति से जुडी हुई होती हैं जिन्हें सीधे तौर पर देखा जा सकता है। 
इसे इस तरह से समझिये, कृषि में जब हम उत्पादन करते हैं चाहे वो कोई भी उत्पादन हो ( चावल, गेहूं, गन्ना) तो वो एक भू भाग पर किया जाता है अर्थात land पर किया जाता है तथा हम जानते land हमको प्रकृति की देन है जिसको किसी कम्पनी में बनाया नही जा सकता। इस तरह कृषि सीधे तौर पर प्रकृति से जुडी हुई है। इसी तरह जब खनन किया जाता है तो अयस्क निकाले जाते हैं तथा हम जानते हैं कि mines हमको प्रकृति की देन हैं। शायद अभी आप बाक़ी के उदहारण को भी समझ गए होंगें। 
अभी आप मुझे बताइयेगा की, क्या मछलीपालन(fishery), मधुमखीपालन(apiculture), अंगूर उत्पादन(viticulture) प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधियाँ हैं या नही? 

द्वितीयक क्षेत्र

अभी द्वितीयक क्षेत्र के बारे में समझते हैं, सबसे पहले द्वितीयक क्षेत्र के भी कुछ उदहारण देखते हैं-----

A- उद्योग(industry)

  • Sugar industry
  • Steel industry
  • Cotton industry

B- विनिर्माण( infrastructute)

C- Manufacturing

द्वितीयक क्षेत्र की परिभाषा

अभी इसकी परिभाषा समझते हैं, द्वितीयक क्षेत्र पूर्ण रूप से प्राथमिक क्षेत्र पर निर्भर रहता है( secondary sector totally depends on primary sector)। अर्थात secondary सेक्टर में उत्पादन करने के लिये प्राथमिक क्षेत्र से संसाधन जुटाने होते हैं।
मान कर चलिए हमे चीनी का उत्पादन करना है तो इसके लिए गन्ना बहुत जरूरी है। तथा हम जानते हैं कि गन्ने का उत्पादन प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत कृषि की गतिविधि में क्या जाता है। अगर गन्ना हमारे पास नही होगा तो क्या चीनी का उत्पादन किया जा सकता है? इसी तरह से इस्पात के उत्पादन में अयस्क की आवश्यकता होती है तथा अयस्क खनन से प्राप्त होते हैं। आगे आप समझ गए होंगे मै क्या कहना चाहता हूँ.......

तृतीयक क्षेत्र

अभी तृतीयक क्षेत्र के बारे पढ़ाई करते हैं। इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है। सबसे पहले इस क्षेत्र के कुछ उदाहरण देखते हैं------
  • सेवा(service)
  • दूरसंचार( telecom)
  • शिक्षा( education)
  • मेहमाननवाज़ी( hospitality)
  • परिवहन( transport)

तृतीयक क्षेत्र की परिभाषा

इसकी परिभाषा को समझते हैं, वे सभी गतिविधियाँ जिन्हें छू अथवा माप नही सकते(अदृश्य)-- (All those activities which can't be touched or measured----- invisible)।
इसे इस तरह समझिये आप पैसे खर्च करने के बाद कोई उत्पाद नही लेते बल्कि सेवा लेते हैं। आप को कहीं जाना है तथा आप रिक्शा करते हैं, इस समय आप एक जगह से दूसरी जगह तक जाने के लिए रिक्शावाले से उसकी service खरीदते हैं तथा उसके बदले भुगतान करते हैं।( अब रिक्शावाले से घर पहुंचने पर उसका रिक्शा तो नही छुड़ा लेंगें ना....करना भी मत ऐसा....hahaha)। इसी तरह telecom companies हमे service देती हैं, मोबाइल पर, टीवी पर।

तृतीयक क्षेत्र जीडीपी में रोल 

अभी ये समझते हैं कि हमारी जीडीपी में इनका कितना रोल है---- हमारी जीडीपी में सर्वाधिक योगदान tertiary sector का, उसके बाद secondary का तथा सबसे कम प्राइमरी सेक्टर का होता है।
अभी ये जानते हैं कि इनमे जनसंख्या कितनी लगी हुई है( population engaged)----- हमारे देश की सर्वाधिक जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र में लगी है( लगभग 55%), उसके बाद secondary सेक्टर में, तथा सबसे कम तृतीयक क्षेत्र में।

Note:हमेशा की तरह आपके कीमती सुझाव आमन्त्रित हैं। याद रखियेगा आपकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है।

Share:

0 comments:

Post a Comment