Saturday, August 5, 2017

GS2- International Relation - Why is India looking West now?

Free Study Materials GS2- International Relation

Why is India looking West now?

Why is India looking West now?


  • India has vital stakes in its western neighbourhood, extending from Afghanistan to Turkey across the oil rich Persian Gulf and the Gulf of Aden. This is the region from where India gets more than two-thirds of its oil and gas supplies.
  • This region, even more than its eastern neighbourhood, where PV Narasimha Rao fashioned an imaginative ‘Look East’ policy based primarily on regional economic integration, is crucial for stability and economic growth in India.
  • It is from the western neighbourhood that India gets around 65 per cent of its oil and more than 80 per cent of its gas supplies. Seven million Indians live in these Arab Gulf monarchies — Saudi Arabia, UAE, Bahrain, Kuwait, Qatar and Oman — which are all members of the Arab Gulf Cooperation Council.

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  • What is significant about the partnerships India is looking to create in the region is the fact that it is defined not just by India’s “Look West” policy, based on its energy and financial needs, but that it is equally defined by the GCC’s “Look East” policy, soliciting greater Indian engagement with West Asia. Several factors have contributed to this fundamental shift in West Asian strategic thinking.
  • First, the structural change in the global energy market with West Asian oil and gas increasingly heading to South and East Asian markets rather than to the Trans-Atlantic markets. Saudi Arabia, Iran and others, who earlier virtually blackmailed India with rising oil prices, will find that deprived of traditional markets in the US, Europe, West Africa and Latin America, their future markets will primarily be major Asian economies like China, Japan, India and South Korea.
  • Second, partly as a consequence of this change in flows and partly owing to the fiscal stress faced by the trans-Atlantic economies, West Asia is looking to India and other Asian powers to step in and offer security guarantees to the region. Many GCC states have welcomed defence cooperation agreements with India.
  • Third, in the wake of the Arab Spring and the mess in Egypt and Iraq, the Gulf states find India and China to be more reliable interlocutors than many western states.
  • Fourth, under pressure from radical and extremist political forces within West Asia, most states in the region have come to value the Indian principle of seeking and securing regional stability as an over-riding principle of regional security.

Saturday, July 29, 2017

UPSC-Hindi-Daily-News-29-July

सामान्य अध्ययन दैनिक समाचार 

29 July 2017(Saturday)

29 July 2017(Saturday)

1.पनामागेट में दोषी नवाज ने दिया इस्तीफा, भाई को सौंप सकते हैं कमान


  • पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बहुचर्चित पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की संपत्ति की जांच के बाद संयुक्त जांच समिति (जेआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें और वित्त मंत्री इशाक डार को शुक्रवार को अयोग्य करार दिया।
  • नवाज शरीफ ने इसके बाद प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवाज शरीफ अपने भाई शहबाज शरीफ को पीएम की कुर्सी सौंप सकते हैं। हालांकि इसमें अभी 45 दिन का पेच है ऐसे में तब तक के लिए शरीफ किसी और विश्वास पात्र को अंतरिम प्रधानमंत्री भी बना सकते हैं।
  • शहबाज शरीफ अभी पंजाब के सीएम हैं। हालांकि, शहबाज पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं। उन्हें पीएम बनने के लिए चुनाव लड़ना होगा।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक शहबाज के पीएम चुने जाने तक 45 दिनों के लिए अंतरिम पीएम के रूप में जिन लोगों के नाम दौड़ में शामिल हैं उनमें रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, स्पीकर अयाज सादिक, बिजनेसमैन शाहिद अब्बासी प्रमुख हैं।
  • यह निर्णय सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही संयुक्त जांच समिति (जेआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया। 
  • इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर श्री शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करें। पनामागेट मामले की जांच के लिए छह मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया गया था।
  • तय समय सीमा के भीतर जेआईटी ने 10 जुलाई को यह रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। मामले की सुनवाई 21 जुलाई को पूरी हो गयी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
  • गौरतलब है कि पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले में नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के नाम का खुलासा होने के बाद से ही पाकिस्तान में विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद से शरीफ को हटाये जाने की मांग हो रही थी।
  • पनामा की विधि फर्म मोजैक फोंसेका के लीक हुए टैक्स दस्तावेजों से दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों के नाम हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबियों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (दोषी करार), मिस के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो, लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी समेत कई हस्तियों के नाम हैं।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के परिवार का ऑफशोर खातों से संबंध है।
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पिता का भी इसी तरह के खातों से संबंध है। इसके अलावा करीब 500 भारतीय हस्तियों के नाम भी पनामा पेपर्स में हैं।

2. पाकिस्तान में अस्थिरता से बढ़ेगी भारत की चिंताएं


  • पनामागेट’ कांड में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद उपजे माहौल पर भारत भी सतर्क नजर बनाए हुए है।
  • पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने और वहां सेना के हस्तक्षेप में और अधिक वृद्धि होने के आसार से भारत चिंतित भी है। भारत की आशंका है कि वहां की अस्थिरता कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठनों को नई ऊर्जा दे सकती है।
  • ऐसे में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। सभी एजेंसियों को खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में चाक चौबंद रहने का निर्देश दिया गया है।1विदेश मंत्रलय के एक अधिकारी नवाज शरीफ के पद से हटने के बाद उपजे हालात को तीन वजहों से भारत के लिए चिंता का कारण बताते हैं। सबसे अहम तो यह है कि मजबूत राजनीतिक नेतृत्व न होने से पाक सेना बेलगाम होगी।
  • वहां पहले से सेना शक्तिशाली है, लेकिन अब वह और अधिक आक्रामक हो सकती है। पाकिस्तानी सेना किसी सूरत में भारत के साथ बेहतर रिश्तों को बर्दाश्त नहीं कर सकती। दूसरी वजह यह है कि अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल भारत विरोधी तेवरों को और तल्ख कर सकते हैं।
  • इस वजह से भारत विरोधी आतंकी संगठनों मसलन जैश-ए-मोहम्मद या तहरीक-ए-आजादी (जमात का नया संगठन) को वहां अपनी गतिविधियों को और बढ़ाने का मौका मिल सकता है। तीसरी वजह यह है कि पाक सेना कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने की नई कोशिश कर सकती है।
  • विदेश मंत्रलय के मुताबिक भारत की तात्कालिक चिंता पाकिस्तानी सेना की तरफ से बंदी बनाए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को लेकर है। सेना की अपीलीय कोर्ट उनके आवेदन को ठुकरा चुकी है। अब उन्होंने सेना प्रमुख कमर बाजवा के पास गुहार लगाई है। वैसे इस मामले की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी चल रही है, लेकिन पाक सेना का कोई भरोसा नहीं है। सेना के दबाव में ही शरीफ सरकार को पठानकोट हमले की जांच रिपोर्ट को दबाना पड़ा था।
  • पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सुधारने की अगर कोई बची खुची उम्मीद थी तो अब उसके भी खत्म होने के आसार हैं। पठानकोट व उड़ी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तल्खी बढ़ी है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब करने की लगातार कोशिश कर रहा है, जबकि सीमा पार से भी कश्मीर में आतंक को बढ़ावा देने की हर मुमकिन कोशिश हो रही है।
  • विदेश मंत्रलय के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘भारत पाकिस्तान में जल्द ही एक मजबूत लोकतांत्रिक सरकार के गठन की उम्मीद करेगा। पाक सेना के साये में रिश्ते सुधारने की बात बेमानी है।’ पाकिस्तान में उथलपुथल का हमेशा भारत पर किसी न किसी स्तर पर पड़ता है।
  • वहां के राजनेता और सेना को भी अक्सर घरेलू मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ मोर्चा खोलना अधिक मुफीद लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार भी ऐसा कुछ हो सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि भारत पहले से सतर्कता बरते।

3. डोकलाम तनाव के बीच राष्ट्रपति जिनपिंग से मिले डोभाल


  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल शुक्रवार को यहां ब्रिक्स देशों के दूसरे शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले। सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में चीन और भारत के बीच जारी तनातनी के बीच यह बैठक हुई।
  • कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर दिनभर चले विचार विमर्श के बाद ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के एनएसए शी से मिले और बातचीत की।
  • चीन ने बृहस्पतिवार को कहा था कि डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जीइची ब्रिक्स एनएसएस बैठक से इतर मिले और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर र्चचा की। हालांकि चीन ने डोकलाम में जारी तनातनी का कोई उल्लेख नहीं किया।
  • 16 जून को तनातनी शुरू होने के बाद से चीन लगातार कहता आया है कि भारतीय सैनिकों की बिना किसी शर्त वापसी के बगैर कोई सार्थक बातचीत नहीं होगी। बैठक में चीनी अधिकारियों तथा ब्रिक्स देशों के एनएसए ने मीडिया के सामने हाथ नहीं मिलाएं।

4. सहयोग बढ़ाएंगे ब्रिक्स देशों के राजस्व विभाग


  • ब्रिक्स देशों के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने समूह के सदस्य देशों के बीच कर मामलों में सहयोग के क्षेत्रों की पहचान के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समूह ने भारत में हाल में लागू नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की तारीफ की है।
  • वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा कि ब्रिक्स में शामिल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राजस्व विभाग के प्रभारी अधिकारियों एवं कर विशेषज्ञों की बैठक चीन के हांगझोउ में 25 से 27 जुलाई के बीच हुई। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने किया।
  • मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक में कर सहयोग के क्षेत्रों की पहचान के लिए एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • सहयोग के इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग, क्षमता निर्माण, अनुभव साझा करना और एक दूसरे के राजस्व विभाग के प्रमुख अधिकारों के बीच नियमित संपर्क की व्यवस्था करना शामिल हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों ने भारत के जीएसटी सुधारों की प्रशंसा की है।

5. चीन से तनातनी के बीच सैन्य रिश्तों को नई धार देंगे भारत व अमेरिका


  • चीन जिस तरह से सीमा विवाद को लेकर भारत से भिड़ा हुआ है, ठीक उसी तरह से अमेरिका के साथ भी उसके रिश्ते दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका के सैन्य संबंधों में नई गर्माहट आने के संकेत हैं।
  • कुछ ही दिन पहले भारत और अमेरिका ने जापान के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में अभी तक का सबसे बड़ा नौ सेना अभ्यास किया था। अब भारत और अमेरिका की वायु सेनाओं के बीच युद्धाभ्यास होने जा रहा है।
  • अमेरिका-भारत के सैन्य रिश्तों पर ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिनों संयुक्त रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे वहां की कांग्रेस में पेश किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर मदद कर रहा है।
  • इसमें सैन्य आयुधों की आपूर्ति से लेकर अत्याधुनिक तकनीक के हथियारों व इनसे जुड़ी तकनीक को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शामिल है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह भारत के साथ मिलकर हथियारों का बड़ा प्रोजेक्ट लगाने को तैयार है।
  • अमेरिका ने सैन्य उत्पादों से जुड़े उद्योगों के लिए भारत की निर्यात संबंधी दिक्कतों को भी दूर कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत को एक अहम रक्षा साझेदार घोषित किया है, लेकिन अब इसे अमल में लाने की जिम्मेदारी विदेश, रक्षा व वाणिज्य मंत्रालय की है।
  • ओबामा प्रशासन ने भी जून, 2016 में भारत को अहम साझेदार घोषित किया था। रिपोर्ट के कई अंश हैं जो भारत व अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के लिए चल रहे कामों की गंभीरता को बताते हैं। मसलन, 2012 से दोनों देश रक्षा तकनीक व कारोबार के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्य समूह काम कर रहे हैं।
  • ये कार्य दल अलग अलग क्षेत्रों (एयरक्राफ्ट कैरियर्स, जेट इंजन, रसायन व जैविक युद्ध की स्थिति में बचाव के उपाय) में स्थापित किए गए हैं। इस कार्यदल की कोशिशों की वजह से भारत को रडार, गैस टरबाइन इंजन, नाइट विजन जैसी तकनीक हासिल हो चुकी है।
  • भारत अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के सहयोग से बना रहा है। जानकारों की मानें तो जिस समय अमेरिकी प्रशासन ने यह रिपोर्ट पेश की है, वह अहम है। रिपोर्ट में हिन्द व प्रशांत महासागर का भी कई बार उल्लेख है। ये बातें भारत के पड़ोसी देश को नागवार गुजरेगी।

6. लोस में आईआईएम विधेयक को मंजूरी : अब बोर्ड चुनेगा आईआईएम अध्यक्ष व निदेशक


  • लोकसभा में शु्क्रवार को आईआईएम (भारतीय प्रबंध संस्थान) विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी गयी। विधेयक में आईआईएम संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है, जिसमें पर्याप्त जवाबदेही भी होगी।
  • विधेयक में जिस ढांचे का प्रस्ताव है उसमें इन संस्थानों का प्रबंधन बोर्ड से संचालित होगा, जहां संस्थान के अध्यक्ष और निदेशक बोर्ड द्वारा चुने जाएंगे। इस विधेयक में ऐसे प्रावधान है कि आईआईएम अब अपने छात्रों को डिग्री दे सकेंगे।
  • सोसायटी होने के कारण प्रतिष्ठित आईआईएम वर्तमान में डिग्री देने को अधिकृत नहीं हैं और प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा और फेलो प्रोग्राम की डिग्री देते हैं। हालांकि इन पाठ्यक्रमों को कमश: एमबीए और पीएचडी के बराबर माना जाता है, लेकिन समानता वैश्विक रूप से स्वीकार्य नहीं है, खासकर फेलो प्रोग्राम के लिए।
  • सदन में बिल पर र्चचा के बाद सदस्यों के सवालों का जवाब देने के क्रम में आईआईएम में फीस और आरक्षण के विषय पर विपक्ष की चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह विधेयक आईआईएम को कितनी अधिक स्वायत्तता प्रदान करने जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब मैं कौंसिल का चेयरमैन नहीं रहूंगा। उन्होंने कहा कि अब सच्चे, ईमानदार और प्रतिभावान छात्र दाखिले से वंचित नहीं होंगे। साथ ही आईआईएम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरने के बारे में विशिष्ठ निर्देश दिये गए हैं।
  • जावड़ेकर ने कहा कि यह ऐतिहासिक बिल है और हम नए युग की ओर जा रहे हैं। सदन में भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक 2017 पर र्चचा का जवाब देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि कुछ सदस्यों ने फीस और आरक्षण के मुद्दे को उठाया है।
  • उन्होंने कहा कि कोई भी छात्र जो गुणवत्ता के आधार पर दाखिला लेना चाहता है, उसके लिए फीस कोई मुद्दा नहीं होगा। इस दिशा में मेधा आधारित छात्रवृत्ति, सीखो और कमाओ, ऋण योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए आरक्षण तो है।
  • पिछले सप्ताह एक विशिष्ठ निर्देश जारी किये गए थे और यह कहा गया था कि संस्थान में अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को भरा जाए। इस तरह से हम लगातार पहल कर रहे हैं।
  • जावड़ेकर ने कहा कि उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी के जरिए हमने शोध और आधारभूत ढांचे को उन्नत बनाने के लिए कोष जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मकसद भारत में विश्व स्तरीय शोध सुविधा सृजित करना है। इस संबंध में पहला आवेदन इसी महीने मंजूर होगा।
  • हमारा लक्ष्य अगले तीन वर्षो में तीन अरब डालर का निवेश जुटाने का है ताकि अनुसंधान एवं शोध के लिये विश्व स्तरीय शोध आरधारभूत ढांचे का विकास किया जा सके।
  • मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता बेहतरी कार्यक्रम के तहत तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए वित्त पोषण का कार्यक्रम तैयार किया गया है।
  • इस योजना में अभी जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर के राज्यों, अंडमन निकोबार द्वीपसमूह, ओडिशा, झारखंड, बिहार, राजस्थान शामिल होंगे।
  • उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए हमने दुनिया के जाने माने शिक्षकों, विद्वानों को जोड़ने की पहल की है।

7. विदेशी मुद्रा भंडार 391 अरब डालर के नए रिकार्ड स्तर पर पहुंचा


  • देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज हुई। गत 21 जुलाई को समाप्त सप्ताह में यह 2.27 अरब डालर बढ़कर 391.33 अरब डालर के नए रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया।
  • इससे पहले 14 जुलाई को समाप्त सप्ताह में यह 2.68 अरब डालर बढ़कर 389.06 अरब डालर के अब तक के रिकार्ड स्तर पर रहा था।
  • रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में 2.23 अरब डालर की बड़ी बढ़ोतरी के कारण विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है।
  • गत 21 जुलाई को विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 367.14 अरब डालर पर रही। स्वर्ण भंडार 20.35 अरब डालर पर लगभग स्थिर रहा।
  • इस बीच आईएमएफ के पास आरक्षित निधि दो करोड़ डालर बढ़कर 2.34 अरब डालर पर और विशेष आहरण अधिकार एक करोड़ डालर बढ़कर 1.49 अरब डालर पर पहुंच गया।

8. चौंकाने वाली कैग रिपोर्ट : फंसे कर्ज वसूली से ज्यादा माफ कर रहे हैं बैंक


  • सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या अनुमान से कहीं अधिक गंभीर है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फंसे की वास्तविक राशि को कम करके दिखा रहे हैं।
  • करीब दर्जन भर सरकारी बैंक ऐसे हैं जिन्होंने अपने फंसे कर्ज की राशि रिजर्व बैंक के अनुमान की तुलना में 15 प्रतिशत तक कम बतायी है।
  • हकीकत यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की राशि को वसूलने से ज्यादा माफ कर रहे हैं।1बैंकों की स्थिति के बारे में यह चौंकाने वाला तथ्य नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है जिसे वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया।
  • कैग ने यह रिपोर्ट ‘सरकारी क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण’ का ऑडिट करने के बाद तैयार की है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया किया गया है कि बैंक अपने बलबूते बाजार से पूंजी जुटाने में नाकाम रहे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वर्ष 2018-19 तक 1,10,000 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का लक्ष्य दिया था। हालांकि इस लक्ष्य के मुकाबले बैंक जनवरी 2015 से मार्च 2017 के दौरान मात्र 7,726 करोड़ रुपये ही बाजार से जुटा पाए।
  • कैग ने 2019 तक बाकी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी बाजार से जुटाने की बैंकांे की क्षमता पर आशंका भी जतायी है।
  • कैग रिपोर्ट में सबसे अहम बात जो सामने आयी है, वह यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की वसूली करने की तुलना में इसे माफ अधिक कर रहे हैं। सरकारी बैंकों ने वर्ष 2011-15 के दौरान भारी भरकम 1,47,527 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज माफ किये जबकि सिर्फ 1,26,160 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी।
  • रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज की राशि तीन साल में बढ़कर तीन गुना हो गयी। मार्च 2014 में बैंकों का सकल एनपीए 2.27 लाख करोड़ रुपये था जो मार्च 2017 में बढ़कर 6.83 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • हालांकि इससे चौंकाने वाली बात यह है कि कई सरकारी बैंक अपनी एनपीए की वास्तविक राशि नहीं दिखा रहे हैं। सरकारी बैंक एनपीए की राशि को कम करके दिखा रहे हैं।
  • कैग रिपोर्ट के अनुसार दर्जन भर सरकारी बैंकों ने अपना जितना एनपीए बताया, वह आरबीआइ के अनुमान से 15 प्रतिशत कम था। 1कैग ने सरकार की ओर से बैंकों को दी गयी पूंजी की प्रक्रिया में भी कई तरह की खामियां उजागर की हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार बैंकों को जो पूंजी दे रही है, उसका उपयुक्त इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र होना चाहिए।

9. हेपेटाइटिस मुक्त होगा देश, अटल के जन्मदिन पर शुरू होगा एक्शन प्लान


  • घातक बीमारी हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी को जड़ से खत्म करने के लिए दुनियाभर में पहल हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार भी हेपेटाइटिस सी के संक्रमण को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय एक्शन प्लान तैयार कर रही है।
  • आगामी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सरकार उस एक्शन प्लान को देशभर में लागू करेगी। यह बातें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कही।
  • वह शुक्रवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने एक साल में देश को हेपेटाइटिस सी से मुक्त करने का एलान किया।
  • उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस ए व हेपेटाइटिस ई की बीमारी दूषित पानी की वजह से होती है। इनके इलाज के लिए सरकार मरीजों को अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध करा रही है।
  • हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए डेढ़ महीने में राष्ट्रीय एक्शन प्लान तैयार हो जाएगा। इस एक्शन प्लान को 25 दिसंबर को देशभर में लागू किया जाएगा। देश में करीब 60 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। एक साल में इस बीमारी को खत्म किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू होने पर हेपेटाइटिस सी की दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिये बजट उपलब्ध कराएगी।
  • आइएलबीएस में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रलय के अधिकारी, डब्ल्यूएचओ आदि के विशेषज्ञ शामिल हुए। इसमें देश को हेपेटाइटिस बी व सी से मुक्त करने पर चर्चा हुई।

10. उत्तराखंड में ‘शिखर’ पर बाघ


  • 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में बाघ ‘शिखर’ पर हैं। कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में इनका कुनबा खूब फल-फूल रहा है तो अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी बाघों ने दस्तक दी है। 12 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर अस्कोट, केदारनाथ और खतलिंग में इनकी मौजूदगी के पुष्ट प्रमाण मिले हैं।
  • ये इस बात का द्योतक है कि यहां बाघों के लिए हर स्तर पर बेहतर वासस्थल हैं, जिसे बनाए रखने में राज्य सफल रहा है। बावजूद इसके तस्वीर का दूसरा पहलू भी है और वह है इनकी सुरक्षा की चुनौती। महकमा भी इसी चिंता में घुला जा रहा है।
  • अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उन स्थानों पर अधिक कैमरा ट्रैप लगाने की तैयारी है, जहां पूर्व में इनकी तस्वीरें कैद हुई हैं।1वन विभाग के पास उपलब्ध रिकार्ड को खंगालें तो उत्तराखंड में 1943 में सबसे पहले 6948 फुट की ऊंचाई पर चकराता के खंडबा में बाघ (टाइगर) की मौजूदगी मिली थी। तब बाघ ने वहां हमले भी किए थे।
  • इसे छोड़ पहाड़ अथवा उच्च हिमालयी क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं था। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। बाघों ने उच्च हिमालयी क्षेत्र में उन स्थानों पर दस्तक दी है, जहां हिम तेंदुओं का बसेरा है।
  • पिछले तीन वर्षो के अंतराल में करीब साढ़े 12 हजार फुट की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ के अस्कोट क्षेत्र में लगे कैमरों में बाघों की तस्वीर तीन बार कैद हुई तो केदारनाथ सेंचुरी के मदमहेश्वर में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर हिम तेंदुओं के वासस्थल में भी बाघ की मौजूदगी मिली है। 12139 फुट की ऊंचाई वाले खतलिंग ग्लेशियर में भी बाघों की तस्वीरें कैमरा ट्रैप में आई हैं।
  • बाघों के उच्च शिखरों तक पहुंचने से वन्यजीव प्रेमियों के साथ ही वन महकमा उत्साहित जरूर हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा की चिंता भी सालने लगी है। फिर यह बेवजह भी नहीं है। कारण राज्य के बाघ पहले ही शिकारियों व तस्करों के निशाने पर हैं।
  • खासकर कुख्यात बावरिया गिरोह ने नींद उड़ाई हुई है। ऐसे में अब बाघों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

Friday, July 28, 2017

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दैनिक समाचार (Daily News)

28 July 2017 (Friday)

28 July 2017 (Friday)

1.डोकलाम गतिरोध के बीच डोभाल और यांग ने की मुलाकात

  • सिक्किम सेक्टर में भारत और चीन के बीच गतिरोध की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष एवं स्टेट काउंसिलर यांग जेची ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक से इतर मुलाकात की तथा द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी समस्याओं पर र्चचा की।
  • डोभाल और यांग की मुलाकात के बारे में चीनी विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, यांग ने द्विपक्षीय मुद्दों एवं बड़ी समस्याओं पर चीन के रुख को विस्तार से रखा। विदेश मंत्रालय के इस कथन को डोकलाम इलाके में बने गतिरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। 
  • समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार यांग ने दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत के वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ अलग से मुलाकात की। खबर में कहा गया है कि इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों तथा बहुपक्षीय मामलों एवं बड़ी समस्याओं पर र्चचा की गई।
  • खबर में यह भी कहा गया है कि यांग ने तीनों वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों के साथ र्चचा की और द्विपक्षीय मुद्दों एवं बड़ी समस्याओं पर चीन का रूख पेश किया। डोभाल और यांग भारत-चीन सीमा व्यवस्था के विशेष प्रतिनिधि हैं।
  • डोभाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए बुधवार को यहां पहुंचे। उनकी यात्रा से सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम इलाके में एक महीने से चल रहे गतिरोध को लेकर भारत और चीन के बीच समाधान निकलने की संभावना बढ़ गई है। 
  • डोभाल और यांग दोनों भारत-चीन सीमा तंत्र के विशेष प्रतिनिधि हैं। आधिकारिक कार्यक्म के अनुसार, डोभाल ब्रिक्स देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात करेंगे। 
  • भारतीय सेना ने भारत-भूटान-चीन सीमा पर चीनी सेना को सड़क बनाने से रोक दिया था जिसके बाद एक महीने से ज्यादा समय से चीन और भारत की सेना आमने-सामने है। 
  • चीन ने दावा किया है कि वह अपने क्षेत्र में सड़क का निर्माण कर रहा है। भारत ने इस निर्माण का विरोध जताया है।

2. भारत स्थिर और शांतिपूर्ण 🌏मालदीव चाहता है : 

  • मालदीव मे कई दिनों से चले आ रहे राजनीतिक संकट पर भारत ने बृहस्पतिवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह स्थिर और शांतिपूर्ण मालदीव देखना चाहता है जिसमें वहां के लोगों की आकांक्षाएं पूरी हों।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारत मालदीव में स्थिरता, विकास और लोकतंत्र के लिए निरंतर समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होने कहा, मालदीव हमारा बहुत महत्वपूर्ण पड़ोसी है। वह दक्षेस का हिस्सा है और हम मालदीव के साथ अपने रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं। 
  • भारत स्थिर, समृद्ध और शांतिपूर्ण मालदीव चाहता है जिसमें मालदीव के लोगों की महत्वाकांक्षाएं पूरी हों। बागले से मालदीव में कई दिनों से जारी राजनीतिक गतिरोध पर भारत के नजरिये के बारे में पूछे जाने पर* कहा कि जहां सैनिकों ने संसद परिसर को घेर लिया है और मुख्य विपक्षी दल मालदीवीयन डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बुधवार को मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में भारत पर दक्षेस की भावना को कमतर करने का आरोप लगाने के बारे में पूछे जाने पर बागले ने कहा कि सम्मेलन एक देश से क्षेत्र में पैदा सीमापार आतंकवाद के कारण रद्द हुआ था और इस देश के बारे में क्षेत्र के सभी देश सारी बातों को जानते हैं।

3. एनएसजी में भारत के प्रवेश पर अमेरिकी नीति यथावत

  • परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी ग्रुप) की सदस्यता के लिए ट्रंप प्रशासन ने भारत की पैरवी की है। विदेश व रक्षा मंत्रलय ने कहा है कि 48 देशों के विशिष्ट समूह के सभी सदस्य भारत का समर्थन करें। भारत ने इसकी सदस्यता के लिए आवेदन पहले ही कर रखा है, लेकिन वामपंथी देश चीन ने इसमें यह कहते हुए अड़ंगा लगा दिया कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं किए हैं, लिहाजा उसे सदस्यता न दी जाए।
  • चीन का यह भी तर्क है कि भारत के साथ पाकिस्तान को भी इस अहम समूह की सदस्यता प्रदान की जाए। चीन के इस रवैये से भारत को एनएसजी की सदस्यता मिलने पर सवाल खड़ा हो गया है। 
  • अमेरिका की ओर से कहा गया है कि यूएसए भारत के एनएसजी सदस्यता के प्रस्ताव का समर्थन करता है और इसके लिए एनएसजी सदस्यों व भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। अमेरिका की ओर से आए इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि भारत की एनएसजी सदस्यता को लेकर अमेरिका की नीति में डोनाल्ड ट्रंप के सरकार में आने के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। 
  • गौरतलब है कि जार्ज बुश के समय से ही भारत को एनएसजी सदस्यता के लिए अमेरिका का समर्थन मिलता रहा है। ओबामा प्रशासन के प्रयासों के बावजूद चीन के विरोध के कारण भारत को पिछली बार एनएसजी सदस्यता नहीं मिल पाई थी।
  • उल्लेखनीय है कि इस अतिविशिष्ट समूह में किसी नए सदस्य को प्रवेश तभी मिलता है जब समूह के सभी सदस्य देश उसे मंजूरी प्रदान कर दें। यदि समूह के मौजूदा सदस्यों में से किसी ने भी सदस्यता का विरोध किया तो नए सदस्य देश को शामिल नहीं किया जा सकता।

4. ओबामा केयर को निरस्त करने वाला बिल खारिज

  • अमेरिकी सीनेट ने ओबामाकेयर के नाम से जाने जाने वाले ‘‘अफोर्डेबल हेल्थ केयर’ को निरस्त करने संबंधी विधेयक को खारिज कर दिया है। 
  • देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओबामाकेयर की लगातार आलोचना करते रहे हैं। ओबामाकेयर की जगह दो वर्ष में नया विधेयक लाने की बात करने वाला विधेयक रिपब्लिकन नेताओं के बहुमत वाले सीनेट ने बुधवार को 45 के मुकाबले 55 मतों से खारिज कर दिया।
  • इससे पहले सदन ने मंगलवार को स्वास्यसेवा कार्यक्रम को हटाने पर बहस शुरू करने के लिए मतदान किया था। उक्त कार्यक्रम पर 23 मार्च 2010 को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हस्ताक्षर किए थे। 
  • ओबामाकेयर के तहत करीब दो करोड़ अमेरिकियों को स्वास्य सेवा कवरेज मिली थी लेकिन रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि यह संघीय सरकार की अनावश्यक दखलअंदाजी है। 
  • उनका कहना है कि इसमें प्रीमियम ज्यादा थे, जबकि मरीजों के सामने विकल्प कम थे।

5. मौलिक अधिकार में नहीं आएगा निजी जानकारी देना

  • सरकार ने गुरुवार को एक बार फिर जोर देकर कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और निजी जानकारी मुहैया कराना मौलिक अधिकार के दायरे में नहीं आएगा। केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष ये दलील दी।
  • मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ के सामने बुधवार को केंद्र सरकार ने कहा था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार हो सकता है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है। 
  • गुरुवार को बहस आगे बढ़ाते हुए अटार्नी जनरल ने कहा कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। निजता के कई पहलू होते हैं और हर पहलू मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं हो सकता। 
  • सूचनात्मक निजता भी होती है। लेकिन आंकड़े जुटाना या अपने बारे में जानकारी देना मौलिक अधिकार में नहीं आएगा। अगर सूचनात्मक निजता का दावा किया जाएगा तो दूसरों के मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे। सूचनात्मक निजता को मौलिक अधिकार तक नहीं बढ़ाया जा सकता। 
  • कई तरह से सूचनाएं दी जाती हैं या एकत्र होती हैं। जैसे रोजगार के फॉर्म में जानकारियां दी जाती हैं। जनगणना में, पासपोर्ट और मतदाता पहचानपत्र बनवाने में सूचनाएं दी जाती हैं जो पब्लिक डोमेन में हैं। किसी ने कभी भी आधार की तरह जनगणना, मतदाता पंजीकरण आदि को चुनौती नहीं दी। 
  • इस पर जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा कि ये सूचनाएं ऐच्छिक नहीं हैं, इसलिए इनको सुरक्षित रखने के लिए प्राइवेसी के बारे में कानून होना जरूरी है।
  • जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने कहा कि जनगणना के आंकड़े सुरक्षित रखने के बारे में कानूनी प्रावधान है। किसी प्राइवेट पार्टी के लिए सरकार से जनगणना के आंकड़े प्राप्त करना बहुत कठिन है। जस्टिस एसए बोबडे ने सरकार से सवाल किया कि क्या ऐसे प्रावधान आधार कानून में हैं। इस पर सरकार ने हां में जवाब देते हुए कहा कि कानून की धारा 29 इस बारे में है। 
  • जस्टिस चेलमेश्वर ने सवाल किया कि मोबाइल नंबर के संरक्षण का क्या। तभी याचिकाकर्ता के वकील गोपाल सुब्रrाण्यम ने कहा कि आधार के आंकड़े सुरक्षित रहने की बात कल्पना मात्र है क्योंकि आधार का इनरोलमेंट प्राइवेट पार्टी करती है। 
  • जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार के बारे में सरकार का तर्क जायज हो सकता है लेकिन एकत्र किए गए डाटा की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र होना चाहिए। इस पर एएसजी तुषार मेहता ने आधार कानून की धारा 29 (2) का हवाला देते हुए कहा कि ये इसी बारे में है। तब जस्टिस नरीमन ने कहा कि आधार कानून में पूरा एक चैप्टर प्राइवेसी के बारे में है और कानून के उद्देश्य और कारणों में भी इसका जिक्र है, तो क्या इसका मतलब यह नहीं निकलता कि कानून में निजता को मान्यता दी गई है। 
  • केंद्र ने ट्रांस जेंडर के सेना में प्रवेश पर रोक लगाने के ट्रंप सरकार के हालिया आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार कई बार एक्जीक्यूटिव आदेश जारी करती है। सरकार को एक्जीक्यूटिव आदेश जारी करने का अधिकार है।
  • महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस सुंदरम ने कहा कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है और आंकड़े एकत्र करना निजता के मौलिक अधिकार के दायरे में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि निजता को मौलिक अधिकार बनाने के मुद्दे पर संविधान सभा में बहस हुई थी और जानबूझकर संविधान निर्माताओं ने इसे मौलिक अधिकार में शामिल नहीं किया। 
  • अगर कोर्ट इसेमौलिक अधिकार घोषित करता है तो ये संविधान संशोधन करने जैसा होगा जिसका कोर्ट को अधिकार नहीं है। सुंदरम ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट इसे मौलिक अधिकार मानने पर विचार करे तो उसे संविधान सभा में इस पर हुई बहस और इसके इतिहास का भी ध्यान रखना होगा।

6. सिविल सर्विसेज के प्रश्नपत्र की जांच कराने पर कोर्ट सहमत

  • सिविल सर्विसेज के प्री एग्जाम (प्राथमिक परीक्षा) के प्रश्नपत्र की जांच कराने पर सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है। महिला अभ्यार्थी ने अदालत में खुद पैरवी करके दावा किया कि प्री एग्जाम में दो सवाल गलत थे। अदालत ने केंद्र को याचिका की कॉपी सौंपने के साथ सुनवाई एक अगस्त को तय कर दी।
  • गौरतलब है कि सिविल सर्विसेज की परीक्षा का आयोजन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) करता है। हालिया विवाद 2017 में कराए गए प्री एग्जाम से जुड़ा है। यह परीक्षा 18 जून को हुई थी। 
  • परीक्षा में भागीदारी करने वाली महिला अभ्यार्थी अशिता चावला ने याचिका दायर करके परीक्षा में पूछे गए दो सवालों को गलत बताया था।
  • उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने विगत के फैसलों में माना है कि अगर किसी सवाल के दो से ज्यादा सही जवाब प्रश्नपत्र में हैं तो उसे गलत करार दिया जाएगा। अशिता ने बताया कि प्री एग्जाम में दो पेपर होते हैं। ये चार सौ नंबर के हैं। इनमें वस्तुनिष्ठ सवालों के जवाब देने होते हैं।
  • जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस अमित्वा रॉय की बेंच ने कहा कि याचिका को जनहित नहीं माना जा सकता, क्योंकि अशिता व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर दलील अदालत के सामने रख रही हैं, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि जो एतराज याचिका में उठाए गए हैं उनकी विवेचना कराई जानी जरूरी है।

7. सरकार ने मुखौटा कंपनियों को घेरा

  • आयकर विभाग अब कंपनियों की आडिट रिपोर्ट और उनके आयकर रिटर्न की कुछ विशेष सूचनाओं तथा पैन के आंकड़े को कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ साझा करेगा। इसके पीछे सरकार का इरादा मुखौटा कंपनियों को घेरने का है।
  • कारपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दो वित्त वर्षो का वित्तीय लेखा नहीं देने के लिए 1.62 लाख कंपनियों का पंजीकरण पहले ही रद्द कर दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर प्रधान महानिदेशक (सिस्टम्स) को एमसीए को थोक सूचनाएं देने का निर्देश दिया है। 
  • थोक सूचनाओं के तहत कंपनियों का स्थायी खाता संख्या (पैन) का आंकड़ा, उनका आयकर रिटर्न, आडिट रिपोर्ट और बैंकों से प्राप्त वित्तीय लेनदेन का ब्योरा साझा किया जाएगा।
  • इसके साथ ही कर विभाग पैन चालान पहचान नंबर (सिन) और पैन निदेशक पहचान नंबर (डिन) भी मंत्रालय के साथ साझा करेगा। कंपनी पंजीयक ने 12 जुलाई, 2017 तक कंपनी कानून, 2013 की धारा 248 के तहत 1,62,618 कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। 
  • धारा 248 के तहत कंपनी पंजीयक को किसी कंपनी का नाम रजिस्टर से हटाने का अधिकार होता है।इनमें से 33,000 कंपनियों का नाम रजिस्टर से मुंबई के कंपनी पंजीयक ने हटाया है। 
  • दिल्ली के कंपनी पंजीयक ने 22,863 कंपनियों तथा हैदराबाद के पंजीयक ने 20,588 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया है।

8. एक्सिस बैंक की झोली में स्नैपडील की फ्रीचार्ज

  • संकटग्रस्त ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील ने अपनी पेमेंट वॉलेट फर्म फ्रीचार्ज को बेचने का सौदा पक्का कर लिया है। करीब एक साल की तलाश के बाद स्नैपडील को एक्सिस बैंक के रूप में इसका खरीदार मिला है। पेमेंट वॉलेट फर्म 385 करोड़ रुपये में बैंक की झोली में गिरेगी। 
  • स्नैपडील ने फ्रीचार्ज को इससे 90 फीसद ज्यादा रकम देकर खरीदा था। 2015 में स्नैपडील ने फ्रीचार्ज को खरीदने में 2500 करोड़ रुपये लगाए थे। 1रिपोर्टो के अनुसार, कुछ अन्य खरीदारों की भी फ्रीचार्ज को खरीदने में दिलचस्पी थी। लेकिन, उनके भाव डेढ़ से दो करोड़ डॉलर (करीब 96 करोड़ से लेकर 128 करोड़ रुपये) के बीच थे।
  • इस तरह देखा जाए तो एक्सिस बैंक ने करीब दूने दाम में यह सौदा पक्का किया है। प्रतिद्वंद्वी ई-कॉमर्स कंपनी व वॉलेट पेटीएम ने फ्रीचार्ज के लिए एक से दो करोड़ डॉलर की पेशकश की थी। जबकि अमेजन ने भी देर से डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के लिए बोली लगाई थी। 
  • सौदे के क्या हैं मायने*: व्यापार और मूल्य वृद्धि के लिहाज से इस सौदे के खास मायने नहीं हैं। वजह यह है कि रिजर्व बैंक प्रवर्तित नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन की ओर से यूपीआइ और आइएमपीएस की शुरुआत के बाद अन्य बैंकों ने वॉलेट में निवेश की रफ्तार घटा दी है। 
  • यूपीआइ -
  • आइएमपीएस ज्यादा सुरक्षित और ग्राहक अनुकूल एप्लीकेशन हैं। गार्टनर में रिसर्च डायरेक्टर सैंडी शेन ने कहा कि डिजिटल वॉलेट भीषण प्रतिस्पर्धा वाला क्षेत्र है, जिसमें दर्जनों खिलाड़ी हैं। प्लेटफॉर्म की स्वीकार्यता बढ़ाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए काफी प्रयासों और संसाधनों की जरूरत होती है।

9. 32जलमार्ग विकसित करने के योग्य :

  • देश में कम से कम 32 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिवहन एवं नौवहन के लिए तकनीकी रूप से योग्य पाया गया है। यह जानकारी सड़क परिवहन और नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में दी।
  • प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही आठ राष्ट्रीय जल मार्गों का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा, 106 नव घोषित राष्ट्रीय जल मार्गों में से 32 को अभी तक तकनीकी तौर पर नौवहन के योग्य पाया गया है और सात राष्ट्रीय जल मार्गों के विकास को मंजूरी भी दे दी गई है। 
  • एक अन्य सवाल के जवाब में गडकरी ने कहा कि देश में प्रति वर्ष चार लाख दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है।
  • हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा में कचरा डालना मना :* सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा नदी क्षेत्र संबंधी अपने फैसले में गंगा नदी या इसकी सहायक नदियों में नगर पालिका का ठोस कचरा, ई अपशिष्ट अथवा जैव चिकित्सा अपशिष्ट डालने पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दिया है।
  • लोकसभा में उदय प्रताप सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि गंगा नदी संरक्षण, सुरक्षा एवं प्रतिबंध प्राधिकरण आदेश 2016 राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा राज्य गंगा समितियों को गंगा नदी में प्रदूषण समाप्त करने तथा इसके संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार देता है। 
  • उन्होंने कहा कि एनजीटी ने हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा नदी क्षेत्र संबंधी अपने 13 जुलाई 2017 के फैसले में गंगा नदी या इसकी सहायक नदियों में नगर पालिका का ठोस कचरा, ई अपशिष्ठ अथवा जैव चिकित्सा अपशिष्ट डालने पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दिया है। प्रत्येक चूककर्ता को 50 हजार रपए की पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देनी पड़ती है। 
  • इसके अलावा रमा देवी के एक सवाल के जवाब में बालियान ने बताया कि नेपाल से भारत की तरफ बहने वाली नदियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है, ताकि इनसे उत्पन्न भयंकर बाढ़ से होनी वाली तबाही को कम किया जा सके। 
  • देश में 1,26,233 पुलिया समेत 1,62,022 पुल : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कांग्रेस पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि 70 वर्ष गुजर जाने के बावजूद देश को, विभाग को यह पता ही नहीं था कि देश में कितने पुल हैं। हमें भी इसकी जानकारी जुटाने में एक साल लगे और फिर पता चला कि 1,26,233 पुलिया समेत देश में 1,62,022 पुल हैं।
  • लोकसभा में अंजू बाला और श्रीरामुलु के प्रश्न के उत्तर में गडकरी ने कहा कि इनमें से 147 पुल खराब स्थिति में पाए गए हैं।

1o. व्हीलर द्वीप का नाम कलाम के नाम पर रखा

  • पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर बृहस्पतिवार को ओडिशा सरकार ने भद्रक जिले में बाहरी व्हीलर द्वीप का नाम एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप रखा है।
  • राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री महेश्वर मोहंती ने बताया कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद कल गजट अधिसूचना जारी की।
  • मोहंती ने गजट अधिसूचना की एक प्रति मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को सौंपी, जिन्होंने पूर्व में व्हीलर द्वीप का नाम कलाम के नाम पर करने की घोषणा की थी।
  • पटनायक ने पूर्व राष्ट्रपति की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर एक समारोह में उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भद्रक जिले में व्हीलर द्वीप और बालेश्वर जिले में चांदीपुर के अस्थायी प्रक्षेपण स्थल से कलाम के भावनात्मक जुड़ाव को याद किया। 
  • श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाम ने देश की प्रतिरक्षा के लिए मिसाइल विकसित करने के अपने प्रयासों के तहत इन दो जगहों पर सबसे ज्यादा समय बिताए।

11. शिखा शर्मा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा

  • निजी क्षेत्र के तीसरे सबसे बड़े बैंक एक्सिस बैंक ने तीसरी बार शिखा शर्मा का कार्यकाल बढ़ा दिया है। उन्हें और तीन साल के लिए बैंक का प्रबंध निदशेक और सीईओ नियुक्त कर दिया है।
  • एक बयान के अनुसार अब वह जून, 2021 तक बैंक का नेतृत्व करती रहेंगी। इसके साथ ही शिखा शर्मा के बैंक से हटने को लेकर चल रही तमाम अफवाहों पर विराम लग गया है। 
  • बयान के अनुसार बैंक के निदेशक मंडल की 26 जुलाई को हुई बैठक में शिखा शर्मा का कार्यकाल तीन साल तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नया कार्यकाल एक जून 2018 से शुरू होगा।

12. अंकोरवाट मंदिर बचाने वाले को मग्सेसे अवार्ड

  • कंबोडिया में प्रख्यात अंकोरवाट मंदिर परिसर को बचाने में *उल्लेखनीय भूमिका अदा करने वाले जापानी इतिहासकार योशियाकी इशीजावा (79) को इस साल का मैग्सेसे अवार्ड दिया* गया है। इशीजावा ने दशकों तक 12 सदी के मंदिर को बचाने के लिए कार्य किया। 
  • मंदिर परिसर देश में वर्षो चली हिंसा से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था।

Thursday, July 27, 2017

UPSC-Hindi-Daily-News-27-July

दैनिक समाचार (Daily News) 

27 July 2017 (Thursday)

27 July 2017 (Thursday)


१.निजता मौलिक अधिकार पर असीमित नहीं

  • निजता पर केन्द्र ने अपने रुख में बदलाव किया है। निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने की याचिकाओं पर बहस के दौरान केन्द्र ने कहा कि निजता मौलिक अधिकार है लेकिन कोई भी अधिकार असीमित नहीं होता। उसी तरह निजता का अधिकार भी कुछ बंधनों के साथ दिया जा सकता है। 
  • निजता की सीमाएं तय करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को है और यह विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग हो सकता है। 
  • केन्द्र ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसलों का बल पर निजता को मौलिक अधिकार मानने से इंकार कर दिया था। चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि निसंदेह निजता एक मौलिक अधिकार है। लेकिन यह सीमित अधिकार है। 
  • अटार्नी जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि निजता को मौलिक अधिकार प्रदान करने का यह मतलब नहीं है कि आधार में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। निजता का मौलिक अधिकार आधार को संरक्षण प्रदान नहीं करता। स्वतंत्रता के अधिकार में ही निजता का अधिकार निहित है। लेकिन इसके हर पहलू को मौलिक अधिकार नहीं कहा जा सकता। 
  • वेणुगोपाल ने कहा कि निजता को अधिकार के रूप से अलग से नहीं देखा जा सकता। निजता विभिन्न अधिकारों का समावेश है। निजता को लेकर हर केस को अलग तरीके से देखने की जरूरत है। निजता एक रूप में एक जैसी नहीं है। इसके हर पहलू को अलग से देखना पड़ेगा। हर पहलू को जोड़ा नहीं जा सकता। जिस तरह की परिस्थिति उत्पन्न होती है, उसी हिसाब से इसकी व्याख्या करनी होगी। 
  • अटार्नी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। लेकिन जीवन का अधिकार स्वतंत्रता के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है। निजी स्वतंत्रता और जीवन के बीच तुलना करने पर जीवन का अधिकार ज्यादा प्रबल है क्योंकि जीवन के बिना स्वतंत्रता की कल्पना नहीं की जा सकती। 
  • यदि अधिकारों में टकराव होता है तो वह अधिकार हावी रहेगा जो जीवन के अधिकार से निकलता है। जहां भी निजी स्वतंत्रता है, उसका स्तर जीवन के अधिकार से कमतर ही है। इसलिए आधार को देश के गरीबों का जीवन सुधाने का हथियार बनाया गया है। 
  • वेणुगोपाल ने कहा कि विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि भारत में अभी भी 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करते हैं। आधार इन्हीं बीपीएल परिवारों के लिए है। विश्व बैंक ने अन्य देशों को आधार अपनाने की सलाह दी है। बायोमैट्रिक ब्यौरा देने किसी की निजता का हनन नहीं हुआ है।

2. उद्योग जगत ने बताए बिटक्वाइन के फायदे

  • नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिए जाने के बीच देश के एक प्रमुख उद्योग मंडल ने कहा है कि क्रिप्टो करेंसी यानी बिटक्वाइन पर नियामक को गौर करना चाहिए और बेहतर नियमन के साथ यह डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
  • बिटक्वाइन एक आभासी मुद्रा है। हाल के समय में नियंतण्र वित्तीय लेन-देन और भुगतान के रूप में बिटक्वाइन चर्चित हुआ है लेकिन क्रिप्टो करेंसी को नियमित करने के लिए कोई दिशानिर्देश न होने से यह काफी जोखिमपूर्ण मुद्रा बनी हुई है। 
  • पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ने आज यहां बिटक्वाइन पर उद्योग का नजरिया सामने रखते हुए एक रिपोर्ट जारी की और उद्योग संगठन के सदस्यों के बीच इस पर र्चचा की। उद्योग मंडल के अध्यक्ष गोपाल जीवराजका ने इस अवसर पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि बिटक्वाइन उचित नियमन के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक बेहतर साधन सृजित करने का अच्छा अवसर है।
  • उन्होंने कहा कि एक पीएचडी चैंबर ने इस मुद्दे पर अपने सदस्यों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम किया है। इसमें क्या सही है और क्या गलत है उन बिंदुओं को सामने रखा गया है। यदि इस प्रौद्योगिकी को उचित नियमन के साथ अमल में लाया जाता है तो यह डिजटल लेनदेन का सस्ता और बेहतर साधन बन सकती है।
  • जीवराजका ने हम इसे एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं और चाहते हैं कि रिजर्व बैंक जैसी नियामकीय संस्थाएं इस पर गौर करें। 
  • इसमें जो जोखिम हैं उनका समाधान होना चाहिए, इस पर बड़े पैमाने पर र्चचा कराई जा सकती है। 
  • उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिटक्वाइन वैध मुद्रा नहीं है लेकिन रिजर्व बैंक ने इसे अवैध भी घोषित नहीं किया है।

3. माइक्रोसाफ्ट ने भारत में पेश किया कइजाला

  • प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसाफ्ट ने बुधवार को अपना नया एप कइजाला आधिकारिक रूप से भारत में पेश किया। कइजाला उत्पादकता केंद्रित एक एप है जो भारतीय कंपनियों व फर्मो को कर्मचारियों, कामगारों के बीच बेहतर समन्वय व संवाद में मददगार होगा। 
  • इसे बड़े समूह में संवाद व कामकाज प्रबंधन के लिए डिजाइन किया गया है और यह 2जी नेटवर्क पर भी आसानी से काम करेगा।माइक्रोसाफ्ट इंडिया के अध्यक्ष अनंत महेश्वरी ने पत्रकारों से कहा कि माइक्रोसाफ्ट कइजाला मेड फोर इंडिया उत्पाद है जो केवल मोबाइल पर चलने वाले एप तथा डिजिटली रूप से कनेक्टेड आधुनिक कार्यस्थलों को आपस में जोड़ता है। 
  • इस एप की मदद से विभिन्न संगठन फम्रे अपने संगठन के भीतर ही लोगों से संवाद कर पाएंगे साथ ही बाहरी लोगों यथा वेंडर व भागीदारों से भी संपर्क में रह सकेंगे। 
  • इस एप का बेसिक संस्करण एंडायड व आईओएस से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है जबकि कंपनी इसके प्रो संस्करण की पेशकश 130 रपए प्रति उपयोक्ता प्रति माह शुल्क के साथ करेगी।

4. परमाणु करार की शर्तों को लेकर अमेरिका-ईरान में रार

  • राष्ट्रपति हसन रोहानी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका द्वारा 2015 के परमाणु करार में किसी तरह का फेरबदल करता है तो ईरान उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया देगा। 
  • अमेरिकी प्रतिनिधिसभा द्वारा प्रतिबंध संबंधी एक नए विधेयक को पारित किए जाने के बाद ईरान का यह बयान आया है।
  • सरकारी प्रसारक आईआरआईबी पर प्रसारित की गई एक कैबिनेट बैठक में रोहानी ने कहा, अगर दुश्मन समझौते के कुछ हिस्सों पर कदम उठाते हैं तो हम भी वैसा ही करेंगे, और अगर वह समूचे करार को लेकर ही कोई कदम उठाते हैं तो हम भी वही करेंगे। 
  • ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों की समिति ने कहा कि वह शनिवार को इस पर अपनी प्रतिक्रिया के लिए असाधारण सत्र बुलाएगी।
  • रोहानी ने कहा, हमें निश्चित रूप से अपनी सुरक्षा क्षमताओं को विकसित करना चाहिए और दूसरों की राय चाहे जो हो हम अपने रक्षात्मक हथियारों को और मजबूत बनाएंगे। 
  • इस मामले में ईरान के वार्ताकार ने बुधवार को कहा, अमेरिकी प्रतिनिधिसभा द्वारा नए प्रतिबंधों को मंजूरी एक शत्रुतापूर्ण उपाय है।

5. रूस पर नए प्रतिबंध की तैयारी

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आपत्तियों के बाद भी हाउस ऑफ़ रिप्रेान्टेटिव्स ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंधों के पक्ष में बुधवार को भारी मतदान हुआ।
  • इस मुद्दे पर अभी मतदान जारी है और प्रतिबंध के पक्ष में 388 सांसदो ने मतदान किया है जबकि इसके विरोध में सिर्फ दो सांसदों ने मतदान किया है। 
  • इस विधेयक को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पास भेजे जाने से पहले सीनेट से मंजूरी मिलनाारूरी है। जहां उनके पास इसे कानून बनाने या वीटो करने का अधिकार है। सीनेट के सांसदों ने अभी यह नहीं कहा कि वह इस विधेयक पर सदन में कब र्चचा और मतदान करेंगे। 
  • इस बीच व्हाइट हाउस ने कहा, राष्ट्रपति ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि क्या वे अमेरिकी सांसद द्वारा पारित रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को मंजूरी देंगे या खारिज करेंगे। 
  • रूस द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल और क्रीमिया पर कब्जा का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने मास्को को कड़ा संकेत देने के लिए यह कदम उठाया है। 
  • इस कानून के अमल में आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति संसद की अनुमति के बिना रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील नहीं दे सकेंगे।

6. सितम्बर में यूएन सत्र को मोदी नहीं, सुषमा संबोधित करेंगी

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी अस्थाई एजेंडा के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सितम्बर में यहां आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में शामिल होने की संभावना नहीं है। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज इस उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगी।
  • महासभा के 72वें सत्र के आम परिर्चचा के लिए वक्ताओं की पहली अस्थाई सूची के अनुसार, सुषमा 23 सितम्बर की सुबह उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगी। उन्होंने पिछले साल भी आम परिर्चचा को संबोधित किया था।आम परिर्चचा की शुरुआत 19 सितम्बर को होगी और यह 25 सितम्बर तक चलेगी। 
  • सभी की नजरें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टिकी हैं जो 19 सितम्बर को महासभा हॉल के ऐतिहासिक हरे मंच से पहली बार वैश्विक नेताओं को संबोधित करेंगे।
  • आम परिर्चचा की शुरुआत होने पर ब्राजील के बाद पारंपरिक तौर पर अमेरिका दूसरा वक्ता होता है। वक्ताओं की सूची के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ 21 सितम्बर को वैश्विक नेताओं को संबोधित करेंगे। 
  • प्रधानमंत्री मोदी पिछले महीने के अंत में ट्रंप के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए वाशिंगटन गए थे। प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने 2014 में पहली बार संयुक्तराष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। 
  • आम परिर्चचा से पहले 2015 में उन्होंने उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सतत विकास सम्मेलन को उस समय संबोधित किया था जब नियंतण्र नेताओं ने सतत विकास का महत्वाकांक्षी 2030 एजेंडा स्वीकार किया था। वह राष्ट्रपति बराक ओबामा की मेजबानी में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक सम्मेलन में भी शामिल हुए थे और घोषणा की थी कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक अभियान में 850 जवानों की अतिरिक्त बटालियन का योगदान करेगा। 
  • यह सम्मेलन एकमात्र मंच रहा है जब मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने दौरे के दौरान शरीफ से मुखातिब हुए थे।

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7. मालदीव पर संसद की स्वतंत्रता बनाए रखने का दबाव

  • सुरक्षा कारणों का हवाला देकर संसद में सेना तैनात करने के मामले में मालदीव पर चौतरफा दबाव पड़ रहा है। विभिन्न दूतावासों ने इस संबंध में बयान जारी कर संसद की स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील की है।
  • मालदीव के विपक्षी दलों का आरोप है कि संसद के अध्यक्ष को हटाने के लिए लाए जा रहे महाअभियोग में हार के डर से राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने संसद में सेना तैनात कर दी।
  • श्रीलंका स्थित अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड्स, नार्वे और स्विट्जरलैंड के दूतावासों ने अपने बयान में इस घटना को लोकतंत्र के लिए घातक बताया। श्रीलंका और मालदीव में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी इसी आशय का बयान जारी किया है। 
  • विपक्षी दलों का कहना है कि सोमवार को सेना के जवानों ने राष्ट्रपति यामीन के आदेश पर संसद के दरवाजे बंद कर दिए, ताकि संसद अध्यक्ष अब्दुल्ला मसीह मुहम्मद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान न हो सके। 
  • विपक्ष का दावा है कि 85 सदस्यों वाले सदन में इस अविश्वास प्रस्ताव को 45 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। वहीं सरकार का कहना है कि सोमवार को कोई मतदान नहीं होना था। 
  • संसद में सेना इसलिए तैनात की गई क्योंकि कुछ दल इसके नजदीक विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे थे।

8. दलाई लामा की बोत्सवाना की प्रस्तावित यात्रा पर बौखलाया चीन

  • चीन ने दलाई लामा की प्रस्तावित यात्रा को लेकर बोत्सवाना को चेतावनी दी है। उसने इस अफ्रीकी देश से चीन के जरूरी हितों का सम्मान करने को कहा है। दरअसल, दलाई लामा 17 से 19 अगस्त के बीच बोत्सवाना की राजधानी गैबोरोन में एक मानवाधिकार सम्मेलन को संबोधित करने वाले हैं।
  • वे वहां के राष्ट्रपति से भी मिलेंगे। दरअसल बोत्सवाना की अर्थव्यवस्था में चीन प्रमुख निवेशक है। इसी की आड़ में वह उस पर दलाई लामा को लेकर 'सही निर्णय' लेने का दबाव बना रहा है। दलाई लामा को चीन एक खतरनाक अलगाववादी बताता है। 
  • चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, 'तिब्बत से जुड़े मसले चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए चिंताजनक हैं। हम संबंधित देश से चीन के हितों का सम्मान करने और उचित राजनीतिक निर्णय लेने की मांग करते हैं।' 
  • उन्होंने कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा, लेकिन किसी अन्य देश को भी ऐसा काम नहीं करने देगा जिससे चीन के हितों को खतरा हो।

9. चांद की सतह के नीचे पानी का विशाल भंडार

  • चांद पर मनुष्यों को बसाने की सोचने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि चांद की सतह के भीतर पानी का विशाल भंडार है। 
  • नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, ये पानी ज्वालामुखी में या चट्टानों की परतों में जमा हो सकता है। वैज्ञानिकों के इस दावे के बाद उन लोगों को मदद मिलेगी जो चांद पर आबादी बसाने के सपने देख रहे हैं।
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद पर भेजे गए अपोलो मून मिशन के दौरान चंद्रमा से जमा किए गए खनिज पदार्थों की दोबारा जांच की गई। इसमें कई चौकाने वाले परिणाम सामने आए। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसमें सामने आया कि चांद की सतह के नीचे बहुत बड़ी मात्र में पानी का भंडार है।
  • इस नई खोज के बाद चांद पर भेजे जाने वाले मानव मिशन पहले की तुलना में ज्यादा आसान साबित हो सकते हैं। पहले ऐसा माना जाता था कि चंद्रमा के दोनों ध्रुवीय क्षेत्रों पर ही पानी खोजा जा सकता है, लेकिन जिन क्रिस्टल कणों में वैज्ञानिकों को अब पानी के चिह्न् मिले हैं, वे चांद की सतह पर दूर-दूर तक फैले हैं।
  • बता दें कि यूरोपीय देश और चीन साथ मिलकर चांद पर एक गांव बसाने की तैयारी कर रहे हैं।170 के दशक में भेजे थे अपोलो 15 और 17 : शोधकर्ताओं ने अपोलो 15 और अपोलो 17 मिशन के दौरान चंद्रमा से जमा किए गए मिनरल्स में से शीशे के टुकड़ों का अध्ययन किया। 
  • यह ज्वालामुखी विस्फोट में निकला एक किस्म का क्रिस्टल था। 1970 के दौर में चंद्रमा पर भेजे गए अपोलो 15 और 17 अभियानों में इस सैंपल को धरती पर लाया गया था। इसकी दोबारा जांच करने पर वैज्ञानिकों ने इसके अंदर भी उतना ही पानी पाया, जितना कि धरती पर पाई जाने वाली आग्नेय चट्टानों (बासॉल्ट रॉक्स) में होता है।
  • भावी अभियानों को मिलेगी मदद : वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के बाद भविष्य में चंद्रमा पर भेजे जाने वाले अभियानों में काफी मदद मिलेगी। 
  • इस नई खोज के कारण वहां जाने वाले अंतरिक्ष यात्री धरती से पानी ले जाने की जगह वहीं चंद्रमा पर पानी निकाल सकेंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद पर कितना पानी है इसकी पूरी जानकारी और अध्ययन के बाद ही दी जा सकती है।

10. सूर्य ग्रहण पर चांद की छाया का पीछा करेंगे नासा के जेट

  • हमारी पृथ्वी की ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत सूर्य के विभिन्न रहस्यों से वैज्ञानिक आज भी अनजान हैं। इनमें से कुछ से पर्दा उठाने के लिए नासा के वैज्ञानिकों ने एक अनोखे मिशन को चुना है। दरअसल वैज्ञानिक योजना बना रहे हैं कि इस बार अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण पर नासा के दो जेट चांद की छाया का पीछा करें। इसके पीछे उनका मकसद सूर्य के बाहरी वातावरण के स्पष्ट तस्वीरें खींचना है।
  • 21 अगस्त को ली जाएंगी तस्वीरें : अमेरिका के साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अमीर कैस्पी और उनकी टीम नासा के दो रिसर्च जेट डब्ल्यूबी-57एफ 21 अगस्त को छाया का पीछा करेंगे। इन जेट के आगे दो टेलीस्कोप लगाए जाएंगे और कैस्पी सूर्य के प्रभामंडल की स्पष्ट तस्वीरें लेंगे। 
  • इसके साथ ही बुध ग्रह की भी तस्वीरें ली जाएंगी, जिसमें देखा जाएगा कि तापमान बढ़ने और घटने पर उस पर क्या प्रभाव पड़ता है।
  • अध्ययन में मिलेगी मदद : अमेरिका के कोलोराडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डैन सेटॉन के मुताबिक, ग्रहण के दौरान हाई फ्रीक्वेंसी तस्वीरों की मदद से बेहतर अध्ययन किया जा सकेगा। बता दें कि पूर्ण सूर्य ग्रहण दुर्लभ होता है और वैज्ञानिकों के अध्ययन के लिए ये उपयुक्त समय होता है। 
  • ग्रहण के दौरान जब चांद पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है और उसकी रोशनी को पूरी तरह से बंद कर देता है तब आकाश में अंधेरे के बीच हल्का प्रभामंडल दिखाई देता है।

11. निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के साथ बातचीत शुरू

  • वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता वाली अधिकारियों की टीम निर्यात को प्रभावित करने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्यों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि अब तक 14 राज्यों के साथ बातचीत की है। 
  • देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को शामिल करने की यह एक सतत प्रक्रिया है। टीम में मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय, कंटेनर कार्पोरेशन आॅफ इंडिया तथा फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) के अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमने निर्यात को प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों पर चर्चा की है। 
  • अधिकारियों की टीम ने निर्यात को लेकर एक रूपरेखा भी दिया है, जिसमें बताया गया कि वे किस देश को कौन सी वस्तुओं के निर्यात पर गौर कर सकते हैं। 
  • अधिकारियों की टीम ने उन मुद्दों पर राज्य के मुख्य सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि निर्यात के समय आने वाली समस्याओं के बार में निर्यातकों के साथ विचार-विमर्श किया। 
  • उन मुद्दों को संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों के समक्ष रखा गया है। इससे देश के निर्यात को बढ़ावा देने में राज्यों को जोड़ने में मदद मिलेगी।

Tuesday, July 25, 2017

UPSC Notes - Sociological analysis of GST?

UPSC/IAS/Study Notes Analysis

Sociological analysis of GST?

Sociological Analysis of GST?

Goods and services tax is new regime in indirect taxation in India. It impacts economy and society profoundly. GST encapsulates the dictum – “One nation, one indirect tax”. It will make India one unified common market. It is a destination based tax unlike the present taxation scheme which is origin based. The final consumer will bear only the GST charged by the last dealer in the supply chain. 

Sociological perspective

Effect on Consumer :- 

  • Tax burden on consumer will be reduced, GST combined with digital India ambition lays road to more digital transactions will bring forced change of rural consumers attitude, women will have more freedom at the press of button. 
  • So digitalisation combined with GST regime enhances their participation in economy to great extent

Effect on Different Classes:- 

  • Luxurious goods and services are taxed at high slabs of 18% and 28% whereas needy commodities are taxed less or not taxed, This will lead to behavioural changes of consumers as well as redistribution of wealth. Escaping indirect tax will be almost difficult or not possible with GSTN. 
  • The more unorganised sector brought under organised sphere more will be beneficial to low income classes because overall savings increases with that easy credit availability to lower middle class businesses becomes easy 

Effect on Social Stratification :- 

  • Economic egalitarianism is utopia but with GST at least tax collection base will increase , if govt redistributes it effectively , it will reduces natural inequalities in different social strata 

Effect on Poverty :- 

  • A study by brian abel smith and peter tells poverty depends upon concept of poverty adopted. 
  • Post GST regime poverty measuring instruments employed should take relative poverty into consideration. 
  • So post GST, pre GST empirical data on poverty will give clear picture 

Effect on Religion:- 

  • Earlier temples are exempted from vat, wealth tax etc by state government now that power of state governments taken away, Under new gst temples are also taxed. For example TTD will face 100 crores tax burden , it will impact free services such religious institutions offers to devotees expensive. 
  • Unlike exemptions granted by the state and Centre in the VAT, GST on all goods and services is made mandatory even for charitable and religious institutions. 
  • Minority religious institutions are exempted from GST, so it may create social , enmity between different communities also. 
  • All such institutions should be taxed or all of them should be exempted to avoid social conflict

Monday, July 24, 2017

GS Paper III - Plastic Risks - An Overview

GS Paper III

(Conservation, Environmental Pollution and Degradation)

GS Paper III  (Conservation, Environmental Pollution and Degradation)

Plastic Risks 


A study by US scientists states that humans have created 6.3 billion tonnes of plastic waste since early 1950s when large-scale industrial production of the synthetic materials began. Of this, only 9% has been recycled and 12% incinerated. The remaining 79% lies in landfill sites polluting landscapes and oceans. 
  • The adaptability and durability have accelerated their use and production. However, none of the commonly used plastics is biodegradable. 
  • According to a 2014 report of the United Nations Environment Programme (UNEP), “the overall natural capital cost of plastic use in the consumer goods sector each year is $75 billion”. 
  • In May 2017, an estimated 38 million pieces of trash was found on the beaches of the Henderson Island in the Pacific Ocean. 
  • This accumulation of plastics is even more disturbing when considering that Henderson Island is also a United Nations World Heritage site and one of the world’s biggest marine reserves. 

What are Plastics?

  • Plastics are macromolecules formed by Polymerization - a process by which individual units of similar molecules ("mers") combine together by chemical reactions to form large or macromolecules. 
  • There are mainly two types of Plastics: thermoplastics and thermosetting plastics.
  • While thermoplastics can be softened by the application of heat and reshaped repeatedly, thermosetting plastics cannot be softened by the application of heat.
  • Bakelite was the first plastic made from synthetic components. It was used for its electrically nonconductive and heat-resistant properties in radio and telephone casings. 
  • It is widely used in diverse products such as kitchenware, jewelry, pipe stems, and children's toys.

Microbeads 

  • Microbeads are smaller forms of plastic, not more than 5 (micrometre) mm in size. They are mainly made up of polyethylene (PE) and contain polypropylene (PP), polyethylene terephthalate (PET), polymethyl methacrylate (PMMA) and nylon.
  • First patented in 1972, they replaced natural material like ground almonds, oatmeal and sea salt as exfoliating agent (to eliminate dead cells from the skin’s surface). Today, many cosmetics and toiletry products use it. 
  • They are also used in industries such as petroleum, textiles, printing and automobile due to their coarse nature. 

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Impact of Microbeads

  • Due to their small size, microbeads collectively have a huge surface area, which allows them to absorb large quantities of toxins and other pollutants. 
  • Often mistaken for food by marine life, microbeads harm waterways, fish and shellfish when discharged through wastewater systems. 
  • The Bureau of Indian Standards (BIS) recently classified the non-biodegradable microbeads as unsafe for use in consumer products.

Measures that can be taken 

  • Banning the use of microbeads in cosmetic industry: The Netherlands was the first country to ban cosmetic microbeads in 2014. 
  • The United States too enacted a law in 2015 to prohibit production of cosmetics containing microbeads. India should also enact such regulations. 
  • Reducing the use and recycling: There is a need to create an ecosystem that reduces the use of plastic and prevents its escape into the external environment. 
  • This must involve everyone, from the manufacturer to the user to the waste collector and the recycling authority. 

ASM - Facts

  • Microbeads are tiny, spherical beads typically 0.5 to 500 mm in size. 
  • They are made made up of polyethylene (PE) and are generally used in cosmetics such as facewash, shampoo as exfoliating agents.
  • BIS is the National Standard Body of India established under the BIS Act 1986 for standardization, marking and quality certification of goods. 
  • It is headquartered at New Delhi and works under the aegis of Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution. The BIS Standard Mark (ISI Mark) is a quality mark.

Saturday, July 22, 2017

Gender Budgeting in the Indian Context

Study Materials IAS /PCS /UPSC 
Gender Budgeting

Gender Budgeting

What is Gender Budgeting?

  • It is an attempt to scrutinize the budget from the gender lens and bring out the gender differential impact.
  • In Gender Budgeting, “Gender” means women and her empowerment.
  • Gender budgeting is used as a tool for effective policy implementation where one can check if the allocations are in line with policy commitments and are having the desired impact

Gender budget is not:

  • A separate budget.
  • About spending the same on women and men.
  • Just about assessing programmes targeted specifically at women and girls.
  • Confined to budgets alone. It covers analysing various economic policies from the gender perspective.

Why is gender budgeting necessary?

  • The achievement of human development is highly dependent on the development and empowerment of the 496 million women and girls. In addition, the Constitution of India has mandated equality for every citizen of the country as a fundamental right.
  • Nevertheless, the reality is that women in India continue to face disparities in access to and control over resources. These disparities are reflected in indicators of health, nutrition, literacy, educational attainments, skill levels, occupational status among others.
  • The poor status and value attached to women is also reflected in the fact that the female sex ratio for the 0-6 age group declined from an already low 945 in 1991 to 927 in 2001, implying that millions of girls went missing in just a decade. There are a number of gender-specific barriers which prevent women and girls from gaining access to their rightful share.
  • Unless these barriers are addressed in the planning and development process, the fruits of economic growth are likely to completely bypass a significant section of the country’s population. This, in turn, does not augur well for the future growth of the economy.

What are the issues in Gender Budgeting adopted by India?

  • Total magnitude of Gender Budget is very low.
  • Focus has been mainly on identifying programmes/schemes meant entirely for women or having visible components that benefit women.
  • Very little information is available in the public domain as regards the assumptions made by various ministries in the reviews of their expenditure profiles from a gender perspective.
  • Many misleading and patriarchal assumptions limit the scope of Gender Budgeting.
  • Sectors such as Water Supply, Sanitation, and Food & Public Distribution still remain outside the purview of the GB Statement.
  • Large schemes do not figure yet in the Gender Budgeting Statement.

What needs to be done to make gender budgeting more effective?

  • Gender budgeting should be fully incorporated into standard budget processes so that it becomes fully institutionalized. Otherwise, even initiatives adopted with enthusiasm may not be sustained. Some elements of gender budgeting, such as an analysis of benefits or tax incidence, may require periodic special efforts.
  • It should address specific goals, such as reducing inequality in educational attainment, that have clear benefits and can be measured even with somewhat crude tools and data.
  • It should draw on civil society for support and assistance with the more research-oriented aspects, and should apply to subnational levels of government where relevant. It should cover both spending and revenue.
  • It should not be a rule set specific goals for spending on women-related objectives because this tends to reduce flexibility, making the budget process less effective.

Related Questions:

  • Women empowerment in India needs gender budgeting. What are requirements and status of gender budgeting in the Indian context? (UPSC Mains 2016)

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SASEC Road Project - Answer to China’s OBOR

Is SASEC road project India’s answer to China’s OBOR?

SASEC Road Project

UPSC Free Study Notes


  • India is expediting South Asian Sub-Regional Economic Cooperation (SASEC) road connectivity program in the backdrop of China’s ‘One Belt One Road’ initiative
  • India is pulling out all stops to expedite the South Asian Sub-Regional Economic Cooperation (SASEC) road connectivity program in the backdrop of China’s ambitious “One Belt One Road” initiative aimed at connecting around 60 countries across Asia, Africa and Europe.
  • As part of this strategy, India’s Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) last week approved a Rs-1,630 crore road project for upgradation and widening of the 65-km road stretch between Imphal in Manipur and Moreh in Myanmar. Once completed, the project being developed with Asian Development Bank’s loan assistance will not only help India connect with its neighbouring countries but will also play an important role in the Great Asian Highway.
  • The Asian Highway network is also referred to as the Great Asian Highway, and is a 141,000-km road network connecting 32 Asian countries being developed under the aegis of the United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific (UNESCAP).
  • “The SASEC program focuses on road infrastructure to improve regional connectivity between Bangladesh, Bhutan, Nepal and India (BBIN). 
  • The Imphal-Moreh project corridor is also a part of Asian Highway 1 and will also strengthen India’s position at the global level as we are attempting to connect with our neighbours and fulfilling our commitments made at the international level,” said a senior Indian government official, requesting anonymity.
  • The seven-member SASEC formed in 2001 comprises India, Bangladesh, Bhutan, Maldives, Nepal, Sri Lanka and Myanmar, and aims to increase economic growth by building cross-border connectivity.
  • The Asian Highway network starts from Tokyo in Japan and connects South Korea, China, Hong Kong, Southeast Asia, Bangladesh, India, Pakistan, Afghanistan and Iran to the border between Turkey and Bulgaria, west of Istanbul, where it joins with European route E80.
  • “Developing road connectivity with neighbours is one of the key agendas of the Modi government,” added the government official quoted above.
  • With an eye on China, India has tasked state-run National Highways and Infrastructure Development Corp. Ltd (NHIDCL) to work on a slew of road and bridge projects to improve connectivity with Bangladesh, Nepal and Myanmar, Mint reported on 6 July.
  • Myanmar occupies a unique geographical position which India plans to leverage.
  • “The road is a part of Asian Highway 1 and will be developed at a cost of Rs-1,630 crore. It is an important connection from India to Myanmar. As per our plans, the first 20 km would be four lane and next (remaining stretch) two-lane. 
  • Once the highway is built, it will reduce travel time by half and will boost the region for traffic and trade,” said Sanjay Jaju, director finance at NHIDCL, which is building the stretch.
  • India has been critical of China developing the China-Pakistan Economic Corridor (CPEC), part OBOR infrastructure initiative cutting through Gilgit and Baltistan areas of Pakistan-occupied Kashmir (PoK). OBOR, first unveiled by Chinese president Xi Jinping in 2013, aims to put billions of dollars in infrastructure projects, including railways, ports and power grids across Asia, Africa and Europe.
  • Myanmar’s role has not been lost on SASEC’s playbook either.
  • “SASEC member countries recognize that most of SASEC’s multimodal connectivity initiatives include Myanmar. Road corridors in Myanmar provide the key links between South Asia and Southeast Asia. Ports in Myanmar will provide additional gateways to the landlocked North Eastern region of India. 
  • Development of multi-modal connectivity between North Eastern region of India, Bangladesh and Myanmar has the potential of unleashing tremendous economic energy in the sub-region,” the Indian government said in a 1 April statement.
  • India is also moving ahead with its plans of accessing transnational multi-modal connectivity to articulate its role
  • in the proposed transportation architecture in the region and beyond. It has been instrumental in implementing the India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway, which will run from Moreh in Manipur to Mae Sot in Thailand via Myanmar.

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UPSC Study Materials For Preliminary Exam 2017

Friday, July 14, 2017

Hindi Study Notes - Goods and Service Tax (GST)

UPSC Free Hindi Study materials GST
UPSC Free Hindi Study materials GST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष, व्यापक, बहुस्तरीय, मूल्य-वर्धित, गंतव्य आधारित कर है।


  • "अप्रत्यक्ष कर" से तात्पर्य वे कर, जो विवर्तित किये जा सकतें हैं अर्थात दूसरे पर टाले जा सकतें हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो कर लगाया किसी और पर जाता है (कराघात) तथा उस कर का अंतिम रूप से वहन कोई और करता है(करापात)।
  • जीएसटी "व्यापक" इस दृष्टि से है कि इसमें केंद्र, राज्य तथा स्थानीय स्तर के लगभग सभी अप्रत्यक्ष कर समाहित कर दिया गया है तथा इसे पूरे भारत में एकसमान स्तर पर लागू किया गया है। इसमें केंद्र के केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवाकर,अतिरिक्त सीमाशुल्क सहित 7 अप्रत्यक्ष कर, राज्यों के विक्री(व्यापार /VAT), मनोरंजन,विलासिता,विज्ञापन, स्टांप ड्यूटी, लाटरी सहित 8 अप्रत्यक्ष कर, स्थानीय स्तर पर चुंगी सहित 2 अप्रत्यक्ष कर जीएसटी में समाहित कर दिया गया है। इसप्रकार इन 17 अप्रत्यक्ष करों के अलावा 23 अधिभार(सेस) को समाप्त कर एक जीएसटी पूरे भारत में लागू कर दिया गया है। परंतु शराब,पेट्रोलियम, विद्युत जैसी वस्तुएँ राज्य की एक बहुत बड़ी आय का स्रोत होने के कारण राज्यों के विरोध की वजह से फिलहाल जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है तथा भविष्य में इसे जीएसटी के दायरे में लाने का अधिकार जीएसटी परिषद् को दिया गया है। सामाजिक हित में शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं को भी फिलहाल जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है।
  • "बहुस्तरीय" से तात्पर्य जीएसटी कच्चे माल के खरीद से लेकर, निर्माण/विनिर्माण, थोक विक्री,फुटकर विक्री तक सभी स्तर पर लगेगा।
  • "मूल्य वर्धित कर" से तात्पर्य प्रत्येक स्तर पर टैक्स वस्तु के पूरी कीमत पर नहीं बल्कि उसमें जो मूल्य बढेगा उसी पर लगेगा।
  • "गंतव्य आधारित" कर से तात्पर्य जीएसटी अंतिम रूप से वहाँ वसूला जायेगा जहाँ उस वस्तु या सेवा की अंतिम पूर्ति होगी या अंतिम रूप से उपभोक्ता खरीदेगा तथा जीएसटी का लाभ भी उसी राज्य को प्राप्त होगा जहाँ अंतिम रूप से विक्री होगा या उपभोग होगा।

अब प्रश्न उठता है कि भारत में जीएसटी लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी???

जीएसटी लागू करने के मुख्यतः तीन कारण है:


  1. राज्यों तथा केंद्र द्वारा अलग-अलग कर वसूलने के कारण कर के ऊपर कर लगता था, जिसे कास्केडिंग इफेक्ट कहा जाता है। जीएसटी लागू होने से यह समस्या समाप्त हो गयी।
  2. वस्तु एवं सेवाकर अलग-अलग होने के कारण कई बार इसपर दोनों कर वसूला जाता था। जीएसटी लागू होने से दोहरा कर वसूली समाप्त हो गया।
  3. विभिन्न राज्यों में वस्तुओं पर लगने वाली कर की दर अलग-अलग थी, जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में समान कर की दर लागू हो गयी है।

इस पूरी प्रक्रिया को एक उदाहरण द्वारा समझने का प्रयास करतें हैं। उदाहरण के तौर पर एक पुस्तक के निर्माण, छपाई, विक्री आदि तक चार चरण को लेतें हैं।

पहला चरण:


  • एक उद्यमी 100₹ का कच्चा माल लुगदी के रूप में खरीदता है तथा इस पर 12% की दर से जीएसटी 12 ₹ (6₹ SGST तथा 6₹ CGST) देता है। इस प्रकार 112₹ में उद्यमी ने लुगदी खरीदा ।

दूसरा चरण:


  • इसे निर्माण/विनिर्माण द्वारा 50₹ पुस्तक का रूप देने, 50₹ छपाई, 38₹ लेखक को रायल्टी, 50₹ उद्यमी का लाभ आदि सभी जोड़कर पुस्तक का मूल्य 300₹ (112+50+50+38+50) आता है।जीएसटी 12% लगने पर टैक्स आयेगा 36₹, लेकिन इस उद्यमी ने पहले ही 12₹ जीएसटी लुगदी खरीदते समय ही दे चुका है इसलिए उसे 12₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा वह जीएसटी 36₹-12₹=24₹(12₹SGST+12₹CGST) चुकाएगा। इसप्रकार वह पुस्तक को 324₹ में थोक विक्रेता को देगा।

तीसरा चरण:


  • थोक विक्रेता यदि अपने परिवहन लागत+लाभ को 26₹ रखता है तो वह फुटकर विक्रेता को पुस्तक 350₹ में देगा। यदि जीएसटी 12% लगती है तो टैक्स हुआ 42₹, परंतु इस पुस्तक पर 36₹(12₹+24) पहले ही जीएसटी दिया जा चुका है अत: थोक विक्रेता को 36₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा जीएसटी 42₹-36₹=6₹(3₹SGST+3₹CGST)ही देगा। इसप्रकार थोक विक्रेता फुटकर विक्रेता को यह पुस्तक 356₹ में देगा।

चौथा चरण :


  • यदि फुटकर विक्रेता अपने परिवहन लागत +लाभ को 44₹ रखता है तो एक छात्र को वह पुस्तक 400₹ में देगा। इसपर जीएसटी 12% लगता है तो जीएसटी हुआ 48₹, परंतु इससे पहले 12₹+24₹+6₹ =42₹ जीएसटी दिया जा चुका है इसलिए फुटकर विक्रेता को 42₹ का इन्पुट क्रेडिट लाभ मिलेगा तथा उसे 48₹-42₹=6₹(3₹SGST+3₹CGST) देना पड़ेगा।

आइए देखतें हैं यह उदाहरण जीएसटी की परिभाषा तथा शर्तों पर कहां तक फिट बैठता है:


  • अप्रत्यक्ष कर है,क्योंकि उद्यमी अपने ऊपर लगने वाले कर को पुस्तक के मूल्य में जोड़कर थोक विक्रेता पर, थोक विक्रेता अपने ऊपर लगने वाले कर को पुस्तक के मूल्य में जोड़कर फुटकर विक्रेता पर तथा फुटकर विक्रेता अपने ऊपर लगने वाले कर को अंतिम रूप से खरीदने वाले उपभोक्ता छात्र पर डाल दिया।
  • व्यापक है क्योंकि जीएसटी में उत्पाद शुल्क,विक्री कर, रायल्टी के रूप में सेवाकर आदि सभी समाहित हो गया तथा पूरे भारत में एकदर से लगा।
  • बहुस्तरीय है क्योंकि कच्चेमाल से लेकर,निर्माण/विनिर्माण, थोक, फुटकर आदि सभी स्तरों पर लगा।
  • मूल्य वर्धित कर है क्योंकि जीएसटी केवल उसी मूल्य पर लगा जो प्रत्येक स्तर पर बढ रहा है। जैसे 12% की दर से जीएसटी पहले स्तर पर मूल्य 100₹ है तो जीएसटी 12₹, दूसरे स्तर पर मूल्य में वृद्घि 200₹ हुआ तो जीएसटी 24₹, तीसरे चरण में मूल्य में वृद्घि 50₹ हुआ तो जीएसटी 6₹, चौथे चरण में मूल्य वृद्घि 50₹ हुआ तो जीएसटी 6₹ लगा।
  • गंतव्य आधारित कर है क्योंकि पहले से लेकर अंतिम चरण तक लगने वाला समस्त जीएसटी पुस्तक के मूल्य में जुड़ता चला गया तथा इसे अंतिम रूप से उपभोग करने वाला अर्थात् पूर्ति के अंतिम चरण उपभोक्ता द्वारा चुकाया गया। पुस्तक का निर्माण चाहे जिस राज्य में हुआ हो परंतु जीएसटी का लाभ उस राज्य को मिलेगा जहाँ यह अंतिम रूप से उपभोग हुआ हो। इसी आधार पर गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु जैसे बड़े पैमाने पर उत्पादक राज्यों ने विरोध किया था।

पहले से अंतिम चरण तक जीएसटी कहीं भी कर के ऊपर कर नहीं लगा अर्थात् कास्केडिंग इफेक्ट से कर प्रणाली मुक्त हो गया।


  • वस्तु तथा सेवाकर एक हो जाने से दोहरा कराधान से मुक्ति मिली।
  • विभिन्न राज्यों में विक्रीकर (व्यापार कर/ VAT) की अलग-अलग दरों के बजाय पूरे देश में समान कर लागू हो गया।

जीएसटी की दरें :


  • जीएसटी के तहत कुल 1211वस्तुओं तथा सेवाओं को पाँच टैक्स स्लैब के तहत रखा गया है। 81% वस्तुएँ 18% या इससे कम दर पर हैं। केवल 19% वस्तुएँ ही 28% टैक्स स्लैब के अंतर्गत शामिल हैं।

1) 0%


  • इसके तहत बिना ब्रांड का आटा, चावल, नमक, दूध, मैदा, बेसन, अनाज, पशुओं का चारा जैसे मूलभूत जीवन उपयोगी वस्तुओं को रखा गया है।

2) 5%


  • इसके तहत चीनी, चायपत्ती, दवाईयाँ, 500₹ तक के जूते, 1000₹ तक के कपडे़, लोहे व इस्पात के समान आदि शामिल है।

3) 12%


  • इसके तहत मक्खन, घी, बादाम, पेन, किताबें, खेल के सामान तथा मोबाइल आदि शामिल है।

4) 18%


  • इसके तहत साबुन, टूथपेस्ट, हेयरआयल, आइस्क्रीम,कम्प्यूटर, बीमा आदि शामिल है।

5) 28%


  • इसके तहत शैंपू, पानमसाला,तंबाकू, चाकलेट,एसी, फ्रीज, कार, डिजिटल कैमरा आदि शामिल है।

कौन होगा GST में शामिल 


  • जीएसटी के तहत केवल वही कारोबारी आयेंगे जिनका वार्षिक टर्नओवर 20 लाख ₹ से अधिक है (विशेष राज्यों में 10 लाख ₹)। ऐसे व्यापारियों को 15 डिजिट का जीएसटी पंजीकरण लेना होगा। 50 लाख ₹ तक का वार्षिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को कंपोजिशन स्कीम के तहत 0.5% से 2.5% तक न्यूनतम टैक्स देने की सुविधा दी गयी है।

जीएसटी के प्रकार :

जीएसटी चार प्रकार की है।

  1. CGST अर्थात् केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर
  2. SGST अर्थात् राज्य वस्तु एवं सेवा कर
  3. UTGST अर्थात् संघ शासित राज्य वस्तु एवं सेवा कर
  4. IGST अर्थात् इंटीग्रेटेड वस्तु एवं सेवा कर।
इसमें CGST केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित जीएसटी का 50% वसूलेगा। SGST/UTGST संबंधित राज्य जहाँ व्यापार हो रहा है निर्धारित जीएसटी का 50% वसूलेगा। IGST वास्तव में कोई कर नहीं है बल्कि यह एक अंतरिम व्यवस्था है। जब व्यापार एक राज्य से दूसरे राज्य में होगा तो चूंकि जीएसटी एक गंतव्य आधारित कर है अत: IGST नेटवर्किंग के तहत किसी एक राज्य में चुकाया गया इन्पुट टैक्स क्रेडिट उस राज्य को स्वत: हस्तांतरित हो जायेगा जहाँ वस्तु या सेवा की अंतिम पूर्ति होगी या जिस राज्य में खरीदा जायेगा।

जीएसटी के फायदे :


  • कर व्यवस्था आसान होगी तथा कर के ऊपर कर (कास्केडिंग इफेक्ट ) से मुक्ति मिलेगी।
  • NCAR के अनुसार देश के जीडीपी में 2-3% की वृद्घि होगी।
  • मूलभूत आवश्यक उत्पादों तथा वस्तुओं की कीमत घटेगी।
  • पूरा ढाँचा आनलाईन होने की वजह से कर चोरी रूकेगी तथा पारदर्शिता बढेगी।
  • पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो जायेगा तथा एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर का लक्ष्य पूरा होगा।
  • वस्तुओं तथा सेवाओं के लागत में कमी आयेगी।
  • अंतर्राज्यीय व्यापार आसान होगा तथा गतिशीलता में तेजी आयेगी।
  • सभी राज्यों को निवेश के समान अवसर प्राप्त होंगें।
  • निर्यात पर कर की दर शून्य हो जायेगी जिससे मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं को बल मिलेगा।
  • इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी।

जीएसटी के नुकसान :


  • जीडीपी का लगभग 60% सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आता है जिसकी दर 14.5% से बढाकर 18% कर दिया गया है जिससे सेवाएँ मँहगी होंगी।
  • कुछ राज्यों के आय में कमी आयेगी।
  • कई राज्यों के आय का प्रमुख स्रोत शराब, पेट्रोलियम आदि है जब इन वस्तुओं को जीए
  • सटी के दायरे में लाया जायेगा तो राज्यों को भारी नुकसान होगा तथा राज्यों की केंद्र पर निर्भरता बढेगी। स्थिति तब ज्यादा गंभीर होगी जब केंद्र व राज्य में अलग-अलग दल की सरकारें होंगी।

चुनौतियां :


  • अनुकूल व्यवस्था का अभाव
  • प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी
  • कर चोरी के संबंध में स्पष्ट तथा प्रभावी तंत्र की कमी
  • जीएसटी के प्रभाव के सही आकलन करने में कठिनाई ।

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GST का भारत में इतिहास 


  • 1st जुलाई 2017 से भारत जीएसटी लागू करने वाला विश्व का 166वाँ देश बन गया । सर्वप्रथम जीएसटी 1954 ई0 में फ्रांस ने लागू किया था। भारत का जीएसटी कनाडा माॅडल पर आधारित है।भारत में जीएसटी लागू करने का प्रथम प्रयास 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रयास किया था। 
  • उस समय पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्तमंत्री असीमदास गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया जिसने जीएसटी माॅडल तैयार किया। वर्ष 2003 में अप्रत्यक्ष कर सुधार हेतु विजय केलकर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया जिसने जीएसटी लागू करने की सिफारिश की। 12 वें वित्त आयोग ने भी अप्रत्यक्ष करों में सुधार हेतु जीएसटी लागू करने का सुझाव दिया। 
  • वर्ष 2006 में तत्कालीन वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ने 1अप्रैल 2010 से जीएसटी लागू करने की घोषणा की परंतु विभिन्न राज्यों के विरोध की वजह से इसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका। भारत में जीएसटी लागू करने के लिए 122वाँ संविधान संशोधन 2014 लाया गया। जिसे राज्यसभा ने 3 अगस्त 2016 तथा लोकसभा ने 8अगस्त 2016 को पारित किया। राज्यों में जीएसटी सर्वप्रथम असम विधानसभा ने पेश किया तथा सबसे पहले तेलंगाना विधानसभा ने पास किया। 
  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा जीएसटी पारित करने वाला अंतिम राज्य है। 8सितंबर 2016 को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद इसे 101वाँ संविधान संशोधन 2016 के रूप में मान्यता मिली। जीएसटी लागू करने के लिए संविधान के 6वीं तथा 7वीं अनुसूची में संशोधन करना पडा़ तथा अनुच्छेद-246A, अनुच्छेद-268A, अनुच्छेद-279A जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद-279A के तहत जीएसटी परिषद् का गठन किया गया है जिसमें 33 सदस्य शामिल हैं। इसका अध्यक्ष केंद्रीय वित्तमंत्री होंगें। एक आईएएस अधिकारी को संयुक्त सचिव, सभी 29 राज्यों तथा 2 केंद्रशासित प्रदेश जहाँ विधानसभा है के मुख्यमंत्रियों द्वारा नियुक्त एक-एक सदस्य शामिल होगा। एक एंटी प्रोफिटियरिंग अथारिटी का गठन भी किया गया है जो इन्पुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने पर सजा का प्रावधान किया गया है।
  • यदि कोई व्यापारी जीएसटी की चोरी करता है तो उसे पाँच वर्ष के लिए कारावास का प्रावधान है। एक जीएसटी कोष की स्थापना भी की गई है जो जीएसटी लागू होने पर राज्यों को होने वाली हानि का 100% अगले पाँच वर्ष तक केंद्र सरकार द्वारा इस कोष से देने का प्रावधान किया गया है। जीएसटी नेटवर्किंग के सफलता पूर्वक क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एन. नारायणमूर्ति की कंपनी इन्फोसिस को दिया गया है|