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UPSC Online Study Materials अर्थशास्त्र (Economics)

मूलभूत आय (Basic Income) की अवधारणा

मूलभूत आय (Basic Income) की अवधारणा

  • संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में सार्वभौमिक आधार पर भारत में मूलभूत आय (Basic Income) की शुरूआत करने की बात कही गई है। बिना किसी शर्त के समस्त नागरिकों को बेसिक आय की सुविधा देने से गरीबी और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से निपटने में निश्चित रूप से आसानी होगी।

विदेशों में मूलभूत आय की अवधारणा –

  • मूलभूत आय के विचार की वकालत कई देशों में की जा रही है। इस विचार के प्रवर्त्तक वामपंथी विचारक फिलिप वेन रहे हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘रियल फ्रीडम फॉर ऑल ‘ में लिखा है कि किसी व्यक्ति के अच्छे जीवन के विचार को मूलभूत आय के द्वारा उसे वास्तविक स्वतंत्रता प्रदान करके साकार किया जा सकता है। मूलभूल आय का अभिप्राय यह है कि सरकार अपने नागरिकों को किसी तरह की जाँच और काम के बिना एक निश्चित राशि उपलब्ध कराए।
  • इसी तर्ज पर फिनलैण्ड ने 25 से 58 वर्ष तक के 2000 बेरोज़गारों को चुना है, जिन्हें वह प्रयोग के तौर पर 560 यूरो की राशि हर महीने प्रदान कर रहा है।यूरोप में इसे लोगों के रोज़गार की स्थिति को देखते हुए देने की बात कही जा रही है। बेसिक आय की अवधारणा को दूसरे शब्दों में नकारात्मक आयकर के नाम से व्याख्यायित किया जा सकता है। यह एक ऐसी योजना है, जिसमें किसी व्यक्ति की आय पर कर लगाने की बजाय उसे कर लाभ दिया जा सकेगा। यह राशि मूलभूत आय एवं कर-देयता के बीच का अंतर होगी।बेसिक आय की वकालत करने वाले बुद्धिजीवी, नकारात्मक आयकर से बेहतर विकल्प मूलभूत आय को मानते हैं। उनका कहना है कि नकारात्मक आयकर वहीं लागू किया जा सकता है, जिस देश के सभी नागरिक आयकर का भुगतान करते हों

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मूलभूत आय के भारतीय प्रस्ताव की विकृतियां

  • आर्थिक सर्वेक्षण के मूलभूत आय के प्रस्ताव में जनकल्याण योजनाओं पर आघात किया गया है। इसके अनुसार गरीबी उन्मूलन और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों की सूची में मूलभूत आय को जोड़ने की जगह इसे विकल्प की तरह प्रयोग में लाया जाएगा।
  • मूलभूत आय को वैकल्पिक योजना की तरह प्रयोग में लाया जाना ठीक नहीं माना जा सकता। विचारकों के मत में बेसिक आय की अवधारणा मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकल्प नहीं है, बल्कि उनका पूरक है।
  • भारतीय संदर्भ में खाद्य सामग्री वितरण को जनकल्याण का बेहतर साधन समझा जाता है। विचारकों के अनुसार खाद्य एवं पोषण सब्सिडी के विकल्प के रूप में बेसिक आय को लाया जाना कहीं से भी उचित नहीं है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस प्रकार की आय दिए जाने के बाद वस्तु या धनराशि के रूप में दी जाने वाली अन्य प्रकार की सहायता समाप्त की जानी चाहिए।
  • आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वैश्विक मूलभूत आय की अवधारणा में धनराशि का हस्तांतरण धनी वर्ग से निर्धन वर्ग को न होना गलत है।
  • बेसिक आय की अवधारणा को सफल बनाने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होगी। इस अवधारणा के प्रवर्तक फिलिप वेन ने माना है कि अगर हम बेसिक आय को वर्तमान कर लाभ के ढांचे से ही जोड़ दें, तो धनी वर्ग को अपनी मूलभूत आय पर कर देने के साथ-साथ अपेक्षाकृत निर्धन वर्ग की आय पर भी कर देना होगा। उनकी पुस्तक में अनेक संसाधनों को तलाशा गया हैं। लेकिन निष्कर्षतः धनी वर्ग पर ही बेसिक आय का दारोमदार होगा।

आर्थिक सर्वेक्षण में मूलभूत आय के लिए तलाशे गए संसाधन –

  • सर्वेक्षण में बेसिक आय के संसाधन के तौर पर किसी तरह के नए कर या अन्य संसाधन जुटाने की कोई बात नहीं कही गई है। इसके अनुसार “मूलभूत आय का भार वहन करने के लिए सरकार को अपने कार्यक्रमों और खर्च की प्राथमिकताएं निर्धारित करनी होंगी।” इसका सीधा सा अर्थ यही है कि सरकार को अपनी अन्य योजनाओं के खर्च में कटौती करके इस योजना को साकार करना होगा।आर्थिक सर्वेक्षण में ऐसी कोई बात नहीं है, जिससे यह लगे कि इसका भार किसी भी तरह से धनी वर्ग पर डाला जाएगा।

निष्कर्ष

  • मूलभूत आय की अवधारणा सार्वभौमिक होनी चाहिए।
  • यह समूह या वर्ग विशेष तक सीमित न हो।
  • इसके लिए कार्य या रोज़गार की कोई शर्त न हो।
  • इसे धनराशि के रूप में दिया जाए।
विश्व में सार्वभौमिक मूलभूत आय को एक तरह से रोज़गार या आय की गारंटी के रूप में दिया जा रहा है या दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो, इसके माध्यम से सरकार धनी से निर्धन को संसाधनों का पुनर्वितरण कर सकती है। इसके माध्यम से प्रत्येक नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य-सुरक्षा जैसी मौलिक सुविधाओं के बाद एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सकेगा।मजे की बात यह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में मूलभूत आय के इन समस्त लक्ष्यों को ताक पर रख दिया गया है। अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं के साथ मनरेगा जैसी योजना के स्थान पर मूलभूत आय उपलब्ध कराने की स्थिति में भारत को दस गुना ज़्यादा खर्च करना होगा। जब तक हमारी सरकार कर-संसाधन नहीं जुटा पाती है, मूलभूत आय की अवधारणा दूर की सोच लगती है।

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MONEY(मुद्रा) पार्ट-2


MONEY(मुद्रा) पार्ट-2

पिछली कक्षा में हम मुद्रा पर चर्चा कर रहे थे, अभी इसी टॉपिक को आगे बढ़ाते हैं।

Call money( मांग मुद्रा) क्या होती है?

  • आइये इसके बारे में थोडा विस्तार से समझ लेते हैं। जब कोई धन अगले दिन लौटाने की शर्त पर दिया जाता है तो उसे call money कहते हैं। कॉल money का लेन देन प्रायः बैंको के बीच होता है और वे आपसी सौदेबाजी के द्वारा call money का रेट( ब्याज दर) तय करते हैं। इसे ही call रेट कहा जाता है।
  • देखिये जिस स्थान पर call मनी का विनिमय(Exchange) किया जाता है अर्थात लेंन देन किया जाता है उसे call money market या Inter bank call money market कहते हैं। यहाँ पर आपको ये समझ आया ना, कि inter bank क्यों कहा गया? क्योंकि विनिमय बैंको के बीच है।
  • Call money market का दुनिया में सबसे बड़ा केंद्र लंदन है। इसे लिबोर( London inter-bank offered rate - LIBOR) कहते हैं। Libor को पूरी विश्व अर्थव्यवस्था की सन्दर्भ ब्याज दर( reference interest rate) भी कहा जाता है। इसका कारण यह है क्यूंकि इसी के आधार पर बाह्य वाणिज्यिक उधारी( External commercial Borrowing- ECB) तय होती है।
  • आइये अब भारत के बारे में जान लेते हैं। जिस ब्याज दर पर भारत में inter- bank market में एक बैंक द्वारा अन्य बैंक को मांग के अनुसार धन दिया जाता है तथा इसकी अवधि 14 - 365 days होती है, Mibor( Mumbai inter bank offered rate) कहा जाता है।

इन्हें इस तरह से लिख सकते हैं-

  • Call money market--- one day
  • Notice money market--- 1- 14 days
  • Inter bank money market--- 14- 365 days

Dear money

उम्मीद है आपको कॉल मनी के बारे में सब समझ आ गया होगा। आइये अब आगे बढ़ते हैं, और अब ये जानते हैं कि ---

  • Dear money क्या होती है? इसको समझना बहुत आसान है, जब भी किसी राशि पर ब्याज दर अपेक्षाकृत अधिक दी जाती है तो उस राशि को dear money कहते हैं। अर्थात जो धन हमको महंगा मिल रहा है।( वैसे भी dear लोग तो हमेशा महंगे ही साबित होते हैं.....)।
Smart money क्या है?

  • यह भी एक प्रकार के बैंक अकाउंट की तरह होता है। लेकिन इसमें cash आपके हाथो में नही होता है। जैसे atm, डेबिट कार्ड आदि। इसको और भी आसानी से इस तरह समझ सकते हैं, आप जो payTm use करते हो और paytm wallet में जो आपके पैसे हैं वो smart money है। इसका प्रयोग आप transaction में तो कर सकते हो लेकिन cash के रूप में आपके पास नही होती।

Consortium loan( संघ/ समूह लोन) क्या होता है?

  • जब दो या दो से अधिक ऋणदाताओं या बैंकों में अस्थायी आपसी समझोते के आधार पर ज्यादा( बड़े ऋण) लोन दिया जाता है तो उस लोन को consortium loan कहते हैं। इसमें दो या दो से अधिक बैंक या ऋणदाता इसलिए शामिल होते हैं ताकि जोखिम कम हो जाये। जब ज्यादा बड़ा ऋण दिया जाता है तो जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिये अगर विषम परिस्थिति में पैसा डूब जाता है तो जोखिम बंट जाता है( जैसा श्री श्री विजय माल्या जी ने कर दिया.....बैंको का पैसा डूब गया)।

Syndicate लोन क्या होता है?

  • दो या दो से अधिक बैंको द्वारा आपसी स्थायी समझोते के आधार पर दिए गए ऋण को सिंडिकेट ऋण कहते हैं।

Coins(सिक्के): 

  • देखिये सिक्को का एक पुराना इतिहास रहा है। मानव ने सबसे पहले मिटटी से सिक्का बनाया जिसको पोटीन कहा गया। इसके बाद धातु के सिक्के बनाये जाने लगे। विभिन्न प्रकार की धातु का प्रयोग होने लगा जैसे ताँबा, चाँदी, सोना आदि। इसी वजह से सिक्को के अलग अलग नाम भी होने लगे जैसे कि, टका, रूपक, दीनार आदि।
  • आइये अब वर्तमान की बात करते हैं। आज के सिक्के कई धातुओं के मिश्रण के होते है, तांबा, चाँदी, निकिल, कांसा आदि। सभी सिक्के भारत सरकार( वित्त मंत्रालय) के द्वारा जारी किये जाते हैं। अधिकतम 1000 रू का सिक्का जारी किया जा सकता है। हालाँकि 1000 रु का सिक्का बाजार में नही है। इसे भारत सरकार द्वारा बाबा भीमराव अम्बेडकर को सम्मान स्वरूप जारी किया गया था। 

टकसाल 

  • आइये अब ये जानते हैं कि सिक्के कहाँ कहाँ पर ढाले जाते है( mint किये जाते है).....जिन्हें टकसाल कहते हैं। प्रत्येक टकसाल के नाम के सामने आपको एक चिन्ह दिखेगा, जिसका अर्थ है उस टकसाल में ढलने वाले सिक्के पर वैसा चिन्ह होता है। 

भारत में 4 टकसाल हैं....

  • मुम्बई---◆
  • नॉएडा---●
  • हैदराबाद---★
  • कोलकाता---no mark
कोलकाता की टकसाल सबसे पुरानी है तथा नॉएडा की टकसाल सबसे नई है। यहाँ पर सिक्को के बारे में एक बात जाननी और जरूरी है जो अक्सर exams में पूछी जा रही है...


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Study of coins( सिक्को का अध्ययन) को क्या कहते है----मुद्राशास्त्र( Numismatics)। इसे अंग्रेजी में जरूर याद रखियेगा।

नोट(note)-: 

  • सभी नोट RBI के द्वारा जारी किये जाते हैं, किंतु एक रूपये का नोट भारत सरकार( वित्त मंत्रालय) के द्वारा जारी किया जाता है। जिस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। ( वर्तमान में वित्त सचिव अशोक लवासा हैं)।
  • अधिकतम 10 हज़ार रूपये का नोट जारी किया जा सकता है।

Important Point About Notes

आइये अब नोट के बारे में कुछ बातें जान लेते हैं । 
  • नोट पर कुल 17 भाषाएँ लिखी होती है। 15 बॉक्स में तथा हिंदी, इंग्लिश।

गांधी जी नोट पर-:

  • देखिये जब हमारा देश आज़ाद हुआ था, तब नोट पर king George की फोटो थी। किन्तु 1948 से नोट पर हमारा राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अर्थात अशोक स्तम्भ आने लगा। किन्तु 48 वर्ष बाद यानि 1996 से नोट पर गांधी जी की फ़ोटो प्रिंट होने लगी।( अभी से गांधी जी का मुस्कुराता हुआ नूरानी चेहरा नोट पर आने लगा....☺)।

अभी ये जानते हैं कि नोट कहाँ पर प्रिंट किये जाते हैं....

  1. देवास(M. P.)
  2. होशंगाबाद( MP)
  3. नासिक(MH)
  4. हैदराबाद( तेलंगाना)

नोट प्रिंट करने वाली पद्धति(system)

  • अभी भारत में नोट प्रिंट करने वाली पद्धति(system) के बारे में समझते हैं।
  • हमारे यहां पर MRS( minimum reserve system, न्यूनतम आरक्षित प्रणाली) कार्यरत है। 
  • भारत में MRS की शुरुआत 1957 में हुई। जिसके तहत RBI को अपने पास कम से कम 200 करोड़ का रिज़र्व रखना होगा जिसमे से 115 cr का gold तथा 85 cr का forex रिज़र्व अर्थात विदेशी मुद्रा भण्डार रखना आवश्यक है।

अभी सवाल ये है यदि RBI के पास 200cr का रिज़र्व है तो क्या वह कितने भी नोट प्रिंट कर सकता है?

  • दरअसल एक वित्तीय वर्ष में हम जितनी वस्तुओं और सेवाओ का उत्पादन करते हैं अपनी जीडीपी में, उतनी ही कीमत के नोट प्रिंट किये जाते हैं। अगर ऐसा नही हुआ तो मांग एवम् आपूर्ति में संतुलन बिगड़ जायेगा।
  • इसे एक उदहारण से समझते हैं, मान कर चलिए 100kg गेंहू के बदले 1 लाख रु प्रिंट होने चाहिए किन्तु 1 cr रु प्रिंट कर दिए गए। तो अब समस्या ये हो जायेगी कि बाजार में money तो बहुत होगी किन्तु गेंहू उतना नही होगा। इसीलिये गेंहू की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जायेगी और रु की value कम हो जायेगी। जिससे हमारा विदेशी व्यापार प्रभावित होगा।
Money में हमको इतना ही पढ़ना था। ये टॉपिक पूरा हो चुका।

Courtesy - Mr Azad

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MONEY(मुद्रा)

MONEY(मुद्रा)

  • पिछली कक्षा में हमने LPG मॉडल के टॉपिक को समाप्त कर लिया था। इस कक्षा से नया टॉपिक शुरू करेंगे। आज हम money( मुद्रा) पर चर्चा करेंगे। जी हाँ हमारा नया टॉपिक money है।

MONEY(मुद्रा)

  • चलिए सबसे पहले यही समझने का प्रयास करते हैं कि मुद्रा क्या होता है? अगर इसका जवाब सिर्फ एक लाइन में देना हो तो हम कह सकते हैं money is a medium of exchange (मुद्रा विनिमय का माध्यम होती है)  
चूँकि मै गहराई से समझने और गहराई से ही समझाने में विस्वास रखता हूँ।इसलिये थोडा विस्तार से समझ लेते हैं। आइये अब प्राचीन समय में चलते हैं हड़प्पा, मोहन्जोदारो के समय में। दुनिया में तीन सभ्यताएं सबसे प्राचीन हैं, 
  1. सिंधु घाटी सभ्यता, 
  2. मेसोपोटामिया सभ्यता तथा 
  3. मिस्र की सभ्यता( सुमेरियन सभ्यता इनके बाद की है)।
इन तीनो में भी सिंधु सभ्यता सबसे पुरानी है (हाल ही के अनुसंधान के अनुसार)।
  • आइये अब वर्तमान से दूर प्राचीन समय की यात्रा करते हैं अर्थात सिंधु घाटी सभ्यता का भ्रमण करते हैं। पहुंच गए ना, अब अपने चारो तरफ नजर दौड़ाइए। कुछ लोग खेती में लगे हैं, कुछ लोग पशुओं में संलिप्त हैं। महिलाये बच्चों को सम्भाल रही हैं। पक्षियों की चहचहाट सुनाई दे रही है। 
  • लेकिन ये क्या अचानक से लीला ताई अपने थैले में कुछ लिए आ रही है। अच्छा... उनके थैले में गेहूं है और वो रामु काका के अहाते की तरफ जा रही हैं। अभी रामु काका और लीला ताई के बिच कुछ बातचीत हुई, मगर रामु काका तो झोपड़ी के अंदर चले गए और दूसरे थैले में शायद कुछ लेकर लौट रहे हैं। लीला ताई ने अपने वाला थैला रामु काका को सौंप दिया और उनका थैला लेकर वापस अपनी झोपड़ी की तरफ जा रही हैं।
  • अच्छा...... अब बात समझ में आई दरअसल लीला ताई गेहूं के बदले में रामु काका से दाल लेकर गयी हैं। मतलब एक वस्तु के बदले में दूसरी वस्तु। जब एक वस्तु के बदले में दूसरी वस्तु का आदान प्रदान हो तो इसी को वस्तु विनिमय( barter system) कहते हैं। प्राचीन समय में अर्थव्यवस्था में व्यापार का माध्यम यही था।

चलिए वापस अपने वर्तमान में लौटते हैं। वस्तु विनिमय माध्यम में समस्याये बहुत सारी होती थीं, 

  • जैसे अगर रामु काका के पास पहले से ही गेंहू है तो वो लीला ताई को दाल क्यों देंगें। 
इन्ही समस्याओं को दूर करने के लिए मुद्रा का प्रादुर्भाव हुआ। अर्थात अब किसी भी वस्तु को मुद्रा देकर खरीद सकते हैं। वर्तमान में मुद्रा का सबसे विकसित रूप हमारे सामने है। अर्थात अगर हम बात करते हैं 2000 रु के नोट की तो इसके बदले में हम 2000 रु की कीमत वाला सामान खरीद सकते हैं। मगर इस नोट की ( इस कागज के टुकड़े की) वास्तविक कीमत 2000 नही है इसीलिए इसे टोकन करेंसी कहा जाता है।

करेंसी दो प्रकार की होती है---

  1. दुर्लभ मुद्रा( Hard currency) तथा 
  2. सुलभ मुद्रा( Soft currency)। 

दोनों के बारे में हम एक एक करके चर्चा करेंगे।

सबसे पहले Hard Currency की बात करते हैं। इसके दो गुण होते हैं-
  1. मांग आपूर्ति से अधिक होती है( Demand is more than Supply)।
  2. विश्व में स्वीकार्य( Acceptable in the World)। अर्थात इसे आसानी से पूरी दुनिया में किसी भी करेंसी से exchange किया जा सकता है।

Hard Currency

यहां पर एक बात याद रखियेगा कि लगभग जितने भी विकसित देश हैं सभी की Currency, Hard Currency होती है (except china)। आइये इसके कुछ उदाहरण देखते हैं-----
  1. -- $-- dollar--- USA
  2. -- €-- euro--- euro zone
  3. --£-- pound--- UK
  4. -- ¥-- yen--- japan
  5. -- ¥-- yuan--- china( चीन की currency को वर्ष 2015 से hard currency consider किया जाता है, ये फैक्ट imp है)

 Soft Currency

चलिए आगे बढ़ते हैं और अब soft currency के बारे में जानते हैं। देखिये hard currency की qualities को बिलकुल उल्टा कर देते हैं तो सॉफ्ट करेंसी की विशेषताये पता चलती हैं। जैसे;
  • आपूर्ति मांग से अधिक होती है( supply is more than demand)।
  • विश्व में स्वीकार्य नही( not acceptable in the world)। अर्थात इसे आसानी से पूरी दुनिया में दूसरी currency में एक्सचेंज नही कर सकते।

लगभग सभी विकासशील देशो की करेंसी soft currency होती है( except china)। भारतीय currency भी सॉफ्ट currency है। 

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात ये है कि जो भी करेंसी जिस देश के द्वारा जारी की जायेगी उस देश में वह हमेशा हार्ड currency ही रहेगी। जैसे, भूटान का उदाहरण लेते हैं। 
  • भूटान एक गरीब देश है और उसकी करेंसी सॉफ्ट करेंसी है। किन्तु स्वम् भूटान में वो हार्ड होगी क्योंकि, भूटान उसकी डिमांड भी है और acceptable भी है।
अभी आप जवाब दीजियेगा... इंडियन currency होगी...
  • India में-?
  • USA में-?
  • Nepal में-?
मेरे अनुमान है आपको अब पूरा माजरा समझ आ गया होगा। आगे बढ़ने से पहले एक बात और जान लेते हैं। भारतीय मुद्रा का जो चिन्ह है अर्थात ₹। इसे IIT के एक स्टूडेंट उदय कुमार ने दिया था। उदय महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्होंने यह चिन्ह वर्ष 2010 में दिया था।
  • अभी तक हमने मुद्रा की सामान्य परिभाषा के बारे में चर्चा की। अभी RBI के अनुसार मुद्रा के वर्गीकरण को समझ लेते हैं।

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RBI के अनुसार मुद्रा के वर्गीकरण

  • यहां पर मुद्रा को M शब्द से indicate किया जाता है। M को चार भागो में विभाजित किया गया है--
  1. M1, 
  2. M2, 
  3. M3 तथा 
  4. M4
चलिये इन चारो को एक एक करके समझते हैं।
सबसे पहले M1 के बारे में बात करते हैं।

M1-- 

  • (1) Money with public
  • (2) Demand deposit( current + saving account)

M1 के अन्तर्गत वह मुद्रा आती है जो लोगो के पास उपलब्ध है। जैसे कि मेरे wallet जितने पैसे हैं अर्थात हमारे पास जितने पैसे हैं वो सभी M1 में आएंगे। इसके अलावा जनता के जितने भी पैसे बैंको में saving या current account में जमा है। ये सभी M1 के अन्तर्गत आएंगे।

M2-- 

  • M1+ post office सेविंग
  • इसमें वह राशि आती है जो M1 में है तथा डाकघरों में जमा है।

M3-- 

  • M3=M1+ Time and fixed deposit अथवा
  • M3= Public money + demand deposit+ Time and fixed deposit
M3 के अन्तर्गत वह राशि होती है जो M1 में है अर्थात public money तथा मांग जमाएँ ( demand deposit) ओर समय जमा व् सावधि जमा अर्थात वो धन जो हम लम्बे समय के लिए बैंको के पास जमा रखते हैं।

M4-- 

  • M4=M3 + post office total deposit
इन सभी को याद रखने के लिए मेरा सुझाव है( अगर पसन्द आये तो.....) कि एक जगह कागज़ पर लिखकर अपने कमरे में लगा लीजिये। केवल 2-4 दिन में जब रोज़ाना नजर पड़ेगी तो आपको रट जायेंगे।
चलिए कक्षा को आगे बढ़ाते हैं। अभी मुद्रा M के बारे में कुछ बातें और जान लेते हैं।

M1 तथा M2 को संकुचित( Narrow Money) मुद्रा कहते हैं।

M3 तथा M4 को व्यापक( Broad Money) मुद्रा कहते हैं।

अगर इन मुद्राओ की तरलता( liquidity) की बात करें तो सबसे अधिक तरल मुद्रा M1 है। इन्हें तरलता के क्रम में इस प्रकार से लिख सकते हैं----

M1>M2>M3>M4

अर्थात सर्वाधिक तरल M1 उसके बाद M2 उसके बाद M3 तथा सबसे कम तरल M4 होती है।

 Money और Near money( सन्निकट मुद्रा) में अंतर होता है?

कक्षा को आगे बढ़ाते हैं तथा ये समझते हैं Money और Near money( सन्निकट मुद्रा) में अंतर होता है?
  • देखिये money के अन्तर्गत हम सिक्के, नोट तथा demand draft( जो आप बैंक से बनवाते है) को शामिल करते हैं।
  • और Near मनी में वित्तीय परिसंपत्ति( financial assets), bond, share, time deposit, bill of exchange आदि को शामिल करते हैं। इन्हें near money इसलिए कहा जाता है क्यूंकि ये cash में transfer हो सकती हैं। अर्थात cash के नजदीक होती हैं।

Credit Money(साख मुद्रा) किसे कहा जाता है?

  • अभी ये समझते हैं कि Credit Money (साख मुद्रा) किसे कहा जाता है?
यह एक ऐच्छिक मुद्रा( optional money) है जिसे स्वीकार करना व्यक्ति की बाध्यता नही होती है। इस मुद्रा का प्रयोग व्यक्ति की साख पर निर्भर करता है। इसके उदहारण हैं, जैसे; 
  • चैक(Check), 
  • बैंक ड्राफ्ट, 
  • हुंडी( Bill of Exchange)।

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LPG Model

LPG Model - Liberalization( उदारीकरण) Privatization ( निजीकरण) Globalization ( भूमंडलीकरण/ वैश्वीकरण)

Introduction-

  • इस कक्षा में हम LPG मॉडल पर चर्चा करेंगें। देखिये 1990 तक दुनिया में परिवर्तन आना शुरू हो गया था । ये वो दौर था जब पूंजीवाद अपने उत्थान पर था और समाजवाद पिछड़ रहा था। इसी कारण से ussr का विघटन हो गया तथा इससे कई नए देश निकल कर सामने आये। जैसे, बेलारूस, उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, ताजिकिस्तान आदि। ussr के उत्तराधिकारी के रूप में रूस( Russia) सामने आया। 
  • ये ध्यान दीजियेगा अभी तक हमारी सबसे ज्यादा मदद ussr के द्वारा ही की जाती रही थी, चाहे वो nuclear टेस्ट हो या आयात-निर्यात। किन्तु अब रूस एक नया देश था तो हमको रूस से वो मदद मिलनी बन्द हो गयी जो ussr से मिलती थी। क्योंकि रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना शुरू किया। इसी समय खाड़ी युद्ध शुरू हो गया( आपने Airlift movie में देखा होगा........)। खाड़ी युद्ध होने से भी हमारी अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा क्यूंकि आयात-निर्यात बाधित हुआ। 
  • ये वो समय था जब हमारी अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़र रही थी। स्थिति कितनी गंभीर थी इसका अनुमान आप इसी से लगा सकते हैं कि हमारे पास केवल एक सप्ताह के आयात का reserve बचा हुआ था।
  • इस समय हमारे देश के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी थे। वो तभी pm बने थे और बनते ही ऐसी समस्याये हो गयी( जैसे सिर मुंडवाते ही ओले पड़ गए......)। इसी समय हमारे देश के वित्तमंत्री एक ऐसे इंसान थे जिनका past ने तो बहुत सम्मान किया मगर वर्तमान ने बिलकुल नही, जी हाँ श्री श्री MMS( मनमोहन सिंह)। 
  • इस भयावह स्थिति में नरसिम्हा राव जी ने मनमोहन जी से सुझाव मांगे की इस समय क्या किया जाये( याद रखना मनमोहन सिंह अर्थशास्त्री बहुत अच्छे रहे हैं चाहे राजनेता अच्छे साबित न हो पाये हों)। इस समय मनमोहन सिंह जी ने सुझाव दिया कि अब हमे अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा। तथा इसी समय उन्होंने LPG मॉडल की अवधारणा( concept) दी। इसीलिये LPG मॉडल को Rao-Manmohan मॉडल भी कहा जाता है|

आइये अब LPG मॉडल को जानते हैं। याद रखना ये lpg गैस नही है....

LPG मॉडल

  • L- liberalization( उदारीकरण)
  • P- privatization( निजीकरण)
  • G- globalization ( भूमंडलीकरण/ वैश्वीकरण)

चलिए कक्षा में आगे बढ़ते हैं और इन्हें एक एक कर discuss करते हैं----

Liberalization( उदारीकरण):

  • During liberalization govt started to give exemption in license policies. Presently license is compulsory in only five sectors. ( उदारीकरण के अंतर्गत सरकार ने लाइसेंस नीतियों में ढील देना शुरू किया। वर्तमान समय में केवल पांच क्षेत्रों में licence अनिवार्य है।)

वो पांच क्षेत्र हैं---

  1. Alcohol
  2. Tobacco products
  3. Defence and Aeroplane
  4. Hazardous chemicals( like acid)
  5. Industrial explosive( like match box, crackers)

Privatization( निजीकरण):

  • During privatization govt started to sell the company of her ownership to private sectors. It is called disinvestment also.( निजीकरण के अन्तर्गत सरकार ने अपनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों को निजी क्षेत्रों को बेचना शुरू किया। इसे विनिवेश भी कहा जाता है।)

Globalization( भूमण्डलीकरण):

  • During globalization India linked her economy with the global economy. ( भूमंडलीकरण के अन्तर्गत भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ा।)

जिसके परिणामस्वरूप आज हमारे देश में बहुत सारी private कंपनीज़ विदेशी है। इसी प्रकार से हमारे देश की कंपनीज़ भी विदेशो में काम कर रही हैं। अर्थात अब भारत closed economy( बन्द अर्थव्यवस्था) नही रहा।

Courtesy - Mr Azad

UPSC|UPPSC| Some Important Books List
महत्वपूर्ण पुस्तकों के नाम और उनके लेखकों के साथ...!

महत्वपूर्ण पुस्तकों के नाम और उनके लेखकों के साथ...!

  • इस पोस्ट में प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ मुख्य परीक्षा के लोकप्रिय विषयों की चर्चा भी की गई है ।

प्रारम्भिक परीक्षा 

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प्रथम प्रश्न पत्र

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  • इतिहास -- एस.के.पाण्डेय (तीन खण्ड) , ज्ञान प्रकाशन
  • भूगोल -- महेश बरनवाल, माजिद हुसैन
  • विज्ञान -- ल्युसेन्ट सामान्य विज्ञान
  • अर्थव्यवस्था-- प्रतियोगिता दर्पण विशेषांक
  • राजव्यवस्था-- एम.लक्ष्मीकांत
  • कृषि, पर्यावरण, जनसंख्या-- परीक्षावाणी 
  • समसामयिक-- प्रतियोगिता दर्पण या क्रानिकल पत्रिका

नोट---

  • **इतिहास एवं समसामयिक के अतिरिक्त सभी विषयों के लिए वाणी प्रकाशन की पुस्तकें उपलब्ध हैं उन्हें अवश्य देखें वह विशेष रूप से UPPSC के लिए ही लिखी गई हैं
  • **घटना चक्र पूर्वावलोकन के प्रश्नों को हल करना उतना ही आवश्यक है जितना दाल में नमक का होना

द्वितीय प्रश्न पत्र

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  • हिंदी-- सीसैट हिन्दी आदित्य प्रकाशन
  • अंग्रेजी-- अरिहन्त प्रकाशन
  • गणित -- महेश मिश्रा
  • रीजनिंग-- अरिहंत प्रकाशन
  • निर्णयन , संचार कौशल आदि के लिए घटना चक्र की पुस्तक

इतिहास

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  • प्राचीन-- झा एवं श्रीमाली
  • मध्यकालीन-- एच.सी.वर्मा सतीश चन्द्र
  • आधुनिक-- बी एल ग्रोवर विपिन चन्द्रा सुमित सरकार
  • विश्व इतिहास -- लालबहादुर वर्मा जैन एवं माथुर

हिन्दी साहित्य

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  • हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास- डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी,
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास- डॉ नगेन्द्र
  • हिन्दी भाषा- डॉ हरदेव बाहरी,
  • छायावाद- डॉ नामवर सिंह
  • कबीर- हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • कविता के नए प्रतिमान- नामवर सिंह
  • हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास- डॉ रामस्वरूप चतुर्वेदी

राजनीति विज्ञान

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  • राजनीति सिद्धांत -संपादक ज्ञान सिंह संधू
  • बदलती दुनिया में भारत की विदेश नीति भाग एक एवं दो - वी पी दत्ता
  • भारत में उपनिवेशवाद एवं राष्ट्रवाद- संपादक हिमांशु राय
  • संयुक्त राष्ट्र संघ - नीना शिरीष
  • नारीवादी राजनीति- संघर्ष एवं मुद्दे - संपादक- साधना, विवेदिता एवं जिनी
  • पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन - सुब्रत मुख़र्जी एवं सुशीला रामास्वामी
  • भारतीय संसद-समस्याएँ एवं समाधान - सुभाष कश्यप

दर्शन शास्त्र 

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  • भारतीय दर्शन – राममूर्ति पाठक एच. पी. सिन्हा
  • धर्म दर्शन -- वेद प्रकाश शर्मा एच. पी. सिन्हा
  • पाश्चात्य दर्शन – सी.डी.शर्मा जगदीश सहाय याकूब मसीह
  • समकालीन दर्शन – जगदीश सहाय
  • सामाजिक राजनीतिक दर्शन – ओ. पी. गाबा

रक्षा अध्ययन

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  • शेखर अधिकारी
  • रामकृष्ण सिंह
  • राकेश सिंह
  • बाबूराम पाण्डेय
  • रजवंत सिंह
  • रामकृपाल सिंह
  • जे एम श्रीवास्तव

समाज कार्य

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  • सुरेन्द्र सिंह
  • इनाम शास्त्री
  • राजाराम शास्त्री
  • कृपाल सिंह सूडान
  • आर वी एस वर्मा
  • राम आहुजा
  • गुप्ता एण्ड शर्मा

लोक प्रशासन

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  • लोक प्रशासन के तत्व और सिद्धान्त- बी. एल. फाडिया
  • लोकप्रशासन- अवस्थी एवं माहेश्वरी
  • लोकप्रशासन -सुरेंद्र कटारिया
  • प्रशासनिक-चिंतक -प्रसाद एवं प्रसाद

UPPSC | MPPSC|UPSC|TNPSC | Study Notes

RAMSAR CONVENTION

RAMSAR CONVENTION

Introduction:

  • The Ramsar Convention is an international treaty for the conservation and sustainable use of wetlands. It is also known as the Convention on Wetlands.
  • It is named after the city of Ramsar in Iran, where the Convention was signed in 1971. It came into force in 1975. It is the only global environmental treaty that deals with a particular ecosystem.
  • It provides the framework for national action and international cooperation for conservation and wise use of wetlands and their resources.
  • Every three years, representatives of the Contracting Parties meet as the Conference of the Contracting Parties (COP), the policy-making organ of the Convention which adopts decisions (Resolutions and Recommendations) to administer the work of the Convention and improve the way in which the Parties are able to implement its objectives.

Mission

  • The conservation and wise use of all wetlands through local, regional and national actions and international co-operation, as a contribution toward achieving sustainable development throughout the world.

Ramsar list:

  • At the time of joining the convention, each contracting party designates at least one site for inclusion in the List of wetlands of international Importance (“Ramsar list”).

Advantages of including a site in the ramsar list:

  • Confers it the prestige of international recognition.Express the government’s commitment to ensure the maintenance of the ecological character of the site.

Trans boundary Ramsar Sites:

  • An ecologically coherent site wetland extends across national borders and the ramsar site authorities on both or all side of the border have formally agreed to collaborate in its management and have notified the secretariat of this intent.
  • This is a co-operative management arrangement and not a distinct legal status for the Ramsar sites involved.

International organization partners

The Ramsar Convention works closely with six other organisations known as International Organization Partners (IOPs). These are:
  1. Birdlife International 
  2. International Union for Conservation of Nature (IUCN)
  3. International Water Management Institute (IWMI)
  4. Wetlands International WWF 
  5. International Wildfowl & Wetlands Trust (WWT)
These organizations support the work of the Convention by providing expert technical advice, helping implement field studies, and providing financial support. The IOPs also participate regularly as observers in all meetings of the Conference of the Parties and as full members of the Scientific and Technical Review Panel.

Lists of wetlands of International Importance

  • The List of Wetlands of International Importance included 2,231 Ramsar Sites in March 2016 covering over 2.1 million square kilometres. The country with the highest number of Sites is the United Kingdom with 170, and the country with the greatest area of listed wetlands is Bolivia, with over 140,000 square kilometres.

UPSC - Prelims -GS1 -Conservation-Online Study

IUCN Red List

IUCN Red List

The IUCN Red List is set upon precise criteria to evaluate the extinction risk of thousands of species and subspecies. These criteria are relevant to all species and all regions of the world. 

🔴 Aim:

The aim is to convey the urgency of conservation issues to the public and policy makers, as well as help the international community to try to reduce species extinction. 

According to IUCN (1996), the formally stated goals of the Red List are 

  1. to provide scientifically based information on the status of species and subspecies at a global level.
  2. to draw attention to the magnitude and importance of threatened biodiversity.
  3. to influence national and international policy and decision-making. 
  4. to provide information to guide actions to conserve biological diversity.

🔴 Classification:

Species are classified by the IUCN Red List into nine groups, set through criteria such as rate of decline, population size, area of geographic distribution, and degree of population and distribution fragmentation.
  • Extinct (EX) – No known individuals remaining.
  • Extinct in the wild (EW) – Known only to survive in captivity, or as a naturalized population outside its historic range.
  • Critically endangered (CR) – Extremely high risk of extinction in the wild.
  • Endangered (EN) – High risk of extinction in the wild.
  • Vulnerable (VU) – High risk of endangerment in the wild.
  • Near threatened (NT) – Likely to become endangered in the near future.
  • Least concern (LC) – Lowest risk. Does not qualify for a more at-risk category. Widespread and abundant taxa are included in this category.
  • Data deficient (DD) – Not enough data to make an assessment of its risk of extinction.
  • Not evaluated (NE) – Has not yet been evaluated against the criteria.

When discussing the IUCN Red List, the official term "threatened " is a grouping of three categories: 

  1. Critically Endangered, 
  2. Endangered, and 
  3. Vulnerable.

Prelims GS1 Conservation

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The HIV and AIDS (Prevention and Control) Bill

The HIV and AIDS (Prevention and Control) Bill

  • The HIV and AIDS (Prevention and Control) Bill passed by Parliament does not guarantee access to anti-retroviral drugs and treatment for opportunistic infections
  • There is no denying that it is a good base for an active health rights movement to build upon
  • Understandably, HIV-positive people in the country, estimated at over 21 lakh, are disappointed that the Centre’s commitment to take all measures necessary to prevent the spread of HIV or AIDS is not reflected in the Bill, in the form of the right to treatment

Providing access:

  • The law only enjoins the States to provide access “as far as possible”
  • Beyond this flaw, though, the legislation empowers those who have contracted the infection in a variety of ways: such as protecting against discrimination in employment, education, health-care services, getting insurance and renting property

What the State must do?

  • It is now for the States to show strong political commitment, and appoint one or more ombudsmen to go into complaints of violations and submit reports as mandated by the law
  • Here again, State rules should prescribe a reasonable time limit for inquiries into complaints, something highlighted by the Standing Committee on Health and Family Welfare that scrutinised the legislation
  • Access to insurance for persons with HIV is an important part of the Bill, and is best handled by the government
  • The numbers are not extraordinarily large and new cases are on the decline, according to the Health Ministry

What the reports suggest:

  • Data for 2015 published by the Ministry show that two-thirds of HIV-positive cases are confined to seven States, while three others have more than one lakh cases each
  • Viewed against the national commitment to Goal 3 of the UN Sustainable Development Goals — to “end the epidemic of AIDS” (among others) by 2030 — a rapid scaling up of interventions to prevent new cases and to offer free universal treatment is critical
  • Publicly funded insurance can easily bring this subset of care-seekers into the overall risk pool

What should be done:

  • Such a measure is also necessary to make the forward-looking provisions in the new law meaningful, and to provide opportunities for education, skill-building and employment
  • As a public health concern, HIV/AIDS has a history of active community involvement in policymaking, and a highly visible leadership in the West
  • It would be appropriate for the Centre to initiate active public consultations to draw up the many guidelines to govern the operation of the law
  • Evidently, the requirement for the ombudsman to make public the periodic reports on compliance will exert pressure on States to meet their obligations
  • In an encouraging sign, the Supreme Court has ruled against patent extensions on frivolous grounds, putting the generic drugs industry, so crucial for HIV treatment, on a firm footing

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Lok Adalats

About Lok Adalats

  • NALSA along with other Legal Services Institutions conducts Lok Adalats .Lok Adalat is one of the alternative dispute redressal mechanisms
  • It is a forum where disputes/cases pending in the court of law or at pre-litigation stage are settled/ compromised amicably
  • The Lok Adalat is presided over by a sitting or retired judicial officer as the chairman, with two other members, usually a lawyer and a social worker

Statutory: 

  • Lok Adalats have been given statutory status under the Legal Services Authorities Act, 1987

Final award: 

  • Under the said Act, the award (decision) made by the Lok Adalats is deemed to be a decree of a civil court and is final and binding on all parties and no appeal against such an award lies before any court of law

No appeal: 

  • If the parties are not satisfied with the award of the Lok Adalat though there is no provision for an appeal against such an award, but they are free to initiate litigation by approaching the court of appropriate jurisdiction by filing a case by following the required procedure, in exercise of their right to litigate

No fee: 

  • There is no court fee payable when a matter is filed in a Lok Adalat.If a matter pending in the court of law is referred to the Lok Adalat and is settled subsequently, the court fee originally paid in the court on the complaints/petition is also refunded back to the parties

Members: 

  • The persons deciding the cases in the Lok Adalats are called the Members of the Lok Adalats
  • They have the role of statutory conciliators only and do not have any judicial role

Persuasion: 

  • Therefore they can only persuade the parties to come to a conclusion for settling the dispute outside the court in the Lok Adalat and shall not pressurize or coerce any of the parties to compromise or settle cases or matters either directly or indirectly

Amicable Resolution: 

  • The Lok Adalat shall not decide the matter so referred at its own instance, instead the same would be decided on the basis of the compromise or settlement between the parties
  • The members shall assist the parties in an independent and impartial manner in their attempt to reach amicable settlement of their dispute

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India becomes associate member of International Energy Agency

India becomes Associate Member of International Energy Agency

News:

  • India has become part of IEA Association.

The International Energy Agency (IEA):

  • It is a Paris-based autonomous intergovernmental organization established in the framework of the Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) in 1974 in the wake of the 1973 oil crisis.
  • The IEA was initially dedicated to responding to physical disruptions in the supply of oil, as well as serving as an information source on statistics about the international oil market and other energy sectors.
  • The IEA acts as a policy adviser to its member states, but also works with non-member countries, especially China, India, and Russia.

Mandate:

  • The Agency’s mandate has broadened to focus on the “3Es” of effectual energy policy: energy security, economic development, and environmental protection.
  • The latter has focused on mitigating climate change.
  • The IEA has a broad role in promoting alternate energy sources (including renewable energy), rational energy policies, and multinational energy technology co-operation.
  • IEA member countries are required to maintain total oil stock levels equivalent to at least 90 days of the previous year’s net imports.

Significance:

  • It will allow the country play a more “visible and influential” role in the global energy landscape.
  • The “Activation of Association” is expected to serve as a bridge and platform for wider-ranging and deeper co-operation and collaboration between IEA member and Association countries in the future.
  • India’s engagement with the International Energy Agency (IEA) has enhanced over the last two decades and the “Association” status would facilitate it to participate in meetings of the standing groups, committees and working groups that constitute the IEA governance structure.

ISA:

  • India also envisages a greater partnership with IEA in taking forward the International Solar Alliance framework to other countries in the world.

Apprehension-

  • This membership does not cast any additional obligation on India, however, gives an opportunity for the country to become the voice of the developing countries.

Information:

  • Today, IEA is an important part of global dialogue on energy, providing research, data/statistics, analysis and recommendations on the global energy sector
  • India can also richly gain from IEA’s data gathering processes, survey methodologies and range of energy data, which could enable India in the near future to set up its own robust integrated database agency.

Green energy:

  • India’s participation will enrich the energy efficiency and renewable sectors of IEA member and other countries.

Notes-

  • Important for prelims. 
  • See b2b for IEA. Also note the significance for mains.

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